राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने मंगलवार को अपनी सब्सिडियरी एसीसी एनर्जी और प्रवर्तक के नियंत्रण वाली एलेस्ट लि. में फंड की हेराफेरी की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सेबी अकाउंटिंग एंट्री को समझ नहीं पाया है। उन्होंने कहा कि इन सब चीजों से कंपनी को 18,100 करोड़ रुपये की एसीसी (अत्याधुनिक रसायनिक सेल ) उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना से बाहर किए जाने का जोखिम है।
राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर मेहता ने कहा, ”सबसे पहले, सेबी ने कुछ बातें उठाई हैं। उन्हें सबसे पहले सही जगह पर रखना होगा। दूसरी बात, फंड की कोई हेराफेरी नहीं हुई है। वे अकाउंटिंग एंट्री को समझ नहीं पाए हैं।” उन्होंने कहा कि कंपनी चीजें स्पष्ट करने के लिए तैयार है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के तीन जून के अंतरिम आदेश में एसीसी एनर्जी स्टोरेज और प्रर्वतक के नियंत्रण वाली एलेस्ट प्राइवेट लि. के बीच फंड की हेराफेरी का जिक्र किया गया था। एलेस्ट ने जनवरी, 2025 में एसीसी एनर्जी में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद, उसने सब्सिडियरी यूनिट को 147 करोड़ रुपये दिए। उसने उसी दिन 112 करोड़ रुपये वापस कर दिए। एसीसी एनर्जी स्टोरेज ने मूल्यांकन की जानकारी दिए बिना एलेस्ट में 262 करोड़ रुपये का निवेश भी किया।
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आदेश के अनुसार, कंपनी के एमडी और सीईओ ने माना कि उन्हें इन लेन-देन के बारे में जानकारी नहीं थी। सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि ‘क्रॉस-होल्डिंग’ यानी दो कंपनियों की आपस में हिस्सेदारी की व्यवस्था ने एसीसी एनर्जी में राजेश एक्सपोर्ट्स की हिस्सेदारी को 100 फीसदी से घटाकर 51.05 फीसदी कर दिया और 48.95 फीसदी हिस्सेदारी एलेस्ट को हस्तांतरित कर दी गयी। इसे निवेशकों को गुमराह करने के लिए एक तरीका माना गया। इससे संबंधित-पक्षों के बारे में जानकारी देने के नियमों का उल्लंघन हुआ और धोखाधड़ी वाले व्यापारिक तरीके अपनाए गए।
एसीसी एनर्जी-एलेस्ट में गड़बड़ी सेबी के 109 पेज के उस आदेश का हिस्सा है जिसमें वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2024-25 के बीच सब्सिडियरी की आय की गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। यह गलत सूचना ऐसी कुल आय का 99.8 फीसदी है यानी 15.15 लाख करोड़ रुपये बैठती है।
नियामक ने मेहता को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में कारोबार करने से रोक दिया है और फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है। इन आरोपों की वजह से 18,100 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक रसायनिक सेल उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना में कंपनी की भागीदारी पर भी खतरा मंडरा रहा है। भारी उद्योग मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है और कंपनी को बैटरी बनाने के मुख्य कार्यक्रम से अयोग्य घोषित करने के बारे में अंतिम निर्णय लेने की तैयारी कर रहा है।
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मेहता ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन परियोजना के बारे में कहा कि इसे लागू करने में ‘काफी अच्छी प्रगति’ हुई है और कंपनी ने अनुसंधान एवं विकास में देरी का हवाला देते हुए एक साल का समय और मांगा है। उन्होंने कहा, ”हम सबसे बेहतरीन और पूरी तरह से 100 फीसदी घरेलू स्तर पर विकसित इनोवेशन बैटरी सेल लेकर आ रहे हैं। ऐसी प्रौद्योगिकी दुनिया में कहीं और नहीं है। इसलिए, अनुसंधान एवं विकास में कुछ समय लग रहा है।”
मेहता ने बताया कि कर्नाटक के हुबली में बन रहा एसीसी बैटरी प्लांट 60-65 फीसदी पूरा हो चुका है और कंपनी ने काम में देरी के बारे में मंत्रालय को अपना स्पष्टीकरण दे दिया गया है। उन्होंने कहा, ”मैं यह नहीं कहूंगा कि 100 फीसदी काम हो गया है, लेकिन संतोषजनक प्रगति हुई है।” इस परियोजना को लागू करने की मूल समय-सीमा 2025 के अंत तक थी।