विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने मार्च से अपने कई पायलटों को वेतन भुगतान में देर की है। रॉयटर्स द्वारा देखे गए आंतरिक संदेशों से यह पता चला है। नकदी संकट से जूझ रही विमानन कंपनी ने कहा कि वह परिचालन स्थिर करने के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट योजना के तहत आपातकालीन ऋण लेने की कोशिश कर रही है।
साल 2019 में स्पाइसजेट बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी घरेलू विमानन कंपनी थी। उसके लगभग 15 प्रतिशत यात्री थे। लेकिन तब से यह आंकड़ा गिरकर 3.4 प्रतिशत और वह चौथे स्थान पर आ गई। इसकी लंबे समय से चली आ रही वित्तीय परेशानियां
पश्चिम एशिया युद्ध के कारण और बढ़ गई हैं। इस लड़ाई से ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है और हवाई क्षेत्र तक पहुंच सीमित हो गई है। इस दबाव ने बड़ी प्रतिस्पर्धी विमानन कंपनी इंडिगो और एयर इंडिया को भी प्रभावित किया है।
दो पायलटों तथा 180 से ज्यादा सदस्यों वाले एक व्हाटसऐप ग्रुप की चैट को रॉयटर्स ने देखा है। इसके अनुसार मार्च तक स्पाइसजेट के पास 375 पायलट थे और कई महीनों से उनके वेतन का भुगतान रुका हुआ है। इस व्हाटसऐप ग्रुप में बोइंग विमान उड़ाने वाले पायलट और विमानन कंपनी का कम से कम एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल है।
एक संदेश में स्पाइसजेट के उड़ान परिचालन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र मल्होत्रा ने 26 मई को लिखा कि उन्हें पता है ‘कि वेतन मिलने में देरी की वजह से आप सभी मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं’ और कहा कि फरवरी का बाकी वेतन जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। संदेश में कहा गया, ‘इसमें शक नहीं कि यह परीक्षा की घड़ी है, लेकिन यह कुछ समय के लिए ही है।’ इसके जवाब में एक पायलट ने कहा कि यह संदेश ‘भरोसा दिलाने वाला’ है, लेकिन पूछा कि क्या मार्च, अप्रैल और मई का वेतन जारी करने के लिए कोई समय-सीमा है।
टिप्पणी के लिए पूछे जाने पर मल्होत्रा ने व्हाट्सऐप संदेश में रॉयटर्स को बताया, ‘मैं साफ तौर पर ऐसे किसी संदेश से इनकार करता हूं।’ रॉयटर्स को दिए बयान में स्पाइसजेट ने माना कि भुगतान में देर हुई है। विमानन कंपनी ने कहा, ‘पिछले कुछ महीनों से अपनाई जा रही प्रक्रिया के अनुसार कर्मचारियों को क्रमबद्ध तरीके से भुगतान किया जा रहा है और ज्यादातर कर्मचारियों को मार्च का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।’
स्पाइसजेट ने रॉयटर्स को बताया कि वह भारत सरकार की ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ के तहत रकम जुटाने की कोशिश कर रही है। इस योजना के तहत विमानन कंपनी 15 अरब रुपये (15.674 करोड़ डॉलर) तक का सात साल का सरकारी गारंटी वाला कर्ज ले सकती है।