उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को स्पाइसजेट से कहा कि वह मीडिया कारोबारी कलानिधि मारन एवं केएएल एयरवेज के साथ जारी कानूनी विवाद के सिलसिले में 144 करोड़ रुपये जमा करने के लिए समय बढ़ाने की अर्जी लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे के पीठ ने स्पाइसजेट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी द्वारा दी गई इस दलील पर गौर किया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति पर असर डाला है।
हाल में सरकार द्वारा विमानन कंपनियों के लिए शुरू किए गए 5,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का हवाला देते हुए रोहतगी ने राशि जमा करने के लिए तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया था।हालांकि, शीर्ष अदालत ने समय देने से इनकार कर दिया और स्पाइसजेट को उच्च न्यायालय में अपील करने को कहा। पीठ ने टिप्पणी की, ‘पश्चिम एशिया संकट से पहले क्या हुआ था?
5 मई को जो कुछ हुआ (वित्तीय सहायता की घोषणा) उसे समय सीमा बढ़ाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।’ सुनवाई के दौरान रोहतगी ने कहा, ‘निजी हित को जनहित के आगे झुकना होगा। मेरे पास हजारों कर्मचारी हैं।’ केएएल एयरवेज की ओर से पेश वकील ने समय सीमा बढ़ाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अपील की आड़ में समीक्षा की अनुमति नहीं दी जा सकती।