facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Amazon-Flipkart की 10 मिनट डिलीवरी रेस से बाहर Swiggy! CEO बोले, हर ग्राहक के पीछे पैसा नहीं जलाएंगे

Advertisement

स्विग्गी ने क्विक कॉमर्स प्रतिस्पर्धा के बीच आक्रामक खर्च से दूरी बनाते हुए मुनाफे, टिकाऊ ग्रोथ और इंस्टामार्ट की मजबूती पर फोकस बढ़ाने का संकेत दिया है।

Last Updated- May 28, 2026 | 9:15 AM IST
Swiggy
Representative image

भारत के क्विक कॉमर्स बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Swiggy ने साफ संकेत दिए हैं कि वह हर कीमत पर ग्राहकों की दौड़ में शामिल नहीं होगा। कंपनी के CEO Sriharsha Majety ने कहा कि Swiggy फिलहाल अनियंत्रित खर्च करने के बजाय मुनाफे और मजबूत ग्राहकों पर ध्यान देगी।

तेज डिलीवरी की होड़ में नहीं उतरेगा Swiggy

मजेटी ने Bloomberg News को दिए इंटरव्यू में कहा कि Flipkart, Amazon और Reliance Retail जैसी बड़ी कंपनियां 10 मिनट में डिलीवरी देने और भारी डिस्काउंट के जरिए तेजी से विस्तार कर रही हैं। लेकिन Swiggy ने इस रेस में उसी गति से पैसा खर्च नहीं करने का फैसला लिया है।

उन्होंने कहा कि कंपनी अल्पकाल में कुछ ग्राहकों को खोने के लिए तैयार है, लेकिन उसका फोकस ऐसे ग्राहकों पर रहेगा जो लंबे समय तक जुड़े रहें और बेहतर कारोबार दें।

भारत का क्विक कॉमर्स सेक्टर इस समय दुनिया के सबसे चर्चित उपभोक्ता तकनीकी बाजारों में शामिल है। SoftBank, Temasek और पश्चिम एशिया के कई सॉवरेन फंड्स समेत बड़े निवेशकों ने इस सेक्टर में अरबों डॉलर लगाए हैं।

मुनाफे और टिकाऊ कारोबार पर जोर

Swiggy का मानना है कि लगातार छूट और तेज विस्तार के बजाय टिकाऊ बिजनेस मॉडल ज्यादा अहम है। ऐसे समय में जब प्रतिस्पर्धी कंपनियां बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही हैं, Swiggy खुद को संतुलित और नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

स्विगी की इंस्टामार्ट यूनिट देशभर के शहरों में 1,100 से ज्यादा छोटे वेयरहाउस संचालित कर रही है। इन्हीं डार्क स्टोर्स के जरिए कंपनी मिनटों में किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान ग्राहकों तक पहुंचाती है। हालांकि, मार्च तिमाही में कंपनी ने केवल 7 नए स्टोर जोड़े, जिससे इसके विस्तार की रफ्तार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

निवेशकों को चाहिए ग्रोथ और मुनाफे का स्पष्ट रोडमैप

स्विगी के सह-संस्थापक और सीईओ श्रीहर्ष मजेटी ने कहा कि निवेशकों का साफ संदेश है कि वे तब तक पूरी तरह आश्वस्त नहीं होंगे, जब तक इंस्टामार्ट के लिए मजबूत ग्रोथ और मुनाफे का स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं देता। उन्होंने माना कि केवल खर्च बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इससे चुनौतियां आगे के लिए टल सकती हैं।

क्विक कॉमर्स सेक्टर में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

भारत में क्विक कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है और कंपनियां ग्राहकों तक तेजी से डिलीवरी पहुंचाने के लिए लगातार निवेश कर रही हैं। ऐसे माहौल में स्विगी पर भी विस्तार और मुनाफे के बीच संतुलन बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। कंपनी फिलहाल आक्रामक विस्तार की बजाय टिकाऊ कारोबार मॉडल पर ज्यादा ध्यान देती नजर आ रही है।

कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में करीब 1 अरब डॉलर यानी लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाए थे, लेकिन इसके बावजूद इस साल अब तक इसके शेयरों में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

इस गिरावट के बीच निवेशकों का भरोसा बनाए रखना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

JM Financial Ltd  के विश्लेषकों ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि अगर कंपनी क्विक कॉमर्स सेगमेंट में अपनी पकड़ और गति खो देती है, तो उसके बाजार में प्रासंगिकता पर असर पड़ सकता है। हाल ही में हुई एक शेयरहोल्डर वोटिंग में गवर्नेंस पुनर्गठन का प्रस्ताव बेहद कम अंतर से असफल हो गया। वहीं, स्विग्गी की इंस्टामार्ट यूनिट, जिसे कंपनी के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, उसकी ग्रोथ पिछले दो तिमाहियों से लगातार धीमी पड़ रही है।

इंस्टामार्ट की धीमी रफ्तार बनी चिंता

स्विग्गी की क्विक डिलीवरी सेवा इंस्टामार्ट को कंपनी के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, लेकिन पिछले दो तिमाहियों में इसकी ग्रोथ में गिरावट देखी गई है। यह स्थिति कंपनी के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन गई है।

इन चुनौतियों के बीच स्विग्गी के सह-संस्थापक ने स्पष्ट किया है कि कंपनी अब केवल छूट और ऑफर्स की होड़ में शामिल होने के बजाय अलग पहचान बनाने पर जोर दे रही है। रणनीति का उद्देश्य ऐसे कारण देना है जिनकी वजह से ग्राहक बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटें और जिन्हें प्रतिस्पर्धी आसानी से कॉपी न कर सकें।

कंपनी अब अपने नए प्राइवेट लेबल ग्रॉसरी सेगमेंट को विकसित कर रही है। इसके तहत ताजे और खास उत्पादों पर ध्यान दिया जा रहा है, जैसे कुछ दिनों की शेल्फ लाइफ वाला पनीर और आमतौर पर बड़े रिटेल स्टोर्स में आसानी से न मिलने वाली ताजी मलाई।

कंपनी का दावा है कि ऐसे उत्पाद खरीदने वाले ग्राहकों में दोबारा खरीदारी और जुड़ाव की दर काफी अधिक देखी गई है।

स्विग्गी के CEO ने अपनी रणनीति की तुलना अमेरिकी रिटेल मॉडल से की है। उन्होंने कहा कि जैसे अमेरिका में अलग अलग रिटेल ब्रांड अलग उपभोक्ता जरूरतों को पूरा करते हैं, वैसे ही कंपनी भी अपने ग्राहकों के लिए विशिष्ट अनुभव तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

श्रीहर्ष माजेटी लंबे समय से यह मानते आए हैं कि कंपनी का भविष्य केवल पूंजी तक पहुंच पर नहीं, बल्कि मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और हाइपर-लोकल निष्पादन पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि असली प्रतिस्पर्धा वहीं तय होती है जहां डिलीवरी और ऑपरेशन की दक्षता सबसे अधिक मायने रखती है।

उन्होंने इस संदर्भ में टेलीकॉम सेक्टर के एक बड़े मुकाबले का उदाहरण भी दिया।

एयरटेल और जियो युद्ध का उदाहरण

इस साल की शुरुआत में भारती एयरटेल लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्विग्गी की लीडरशिप टीम के साथ एक ऑफ-साइट मीटिंग में बताया कि कंपनी ने कैसे उस समय रणनीति बदली थी जब मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने बाजार में आक्रामक प्राइस वॉर शुरू किया था।

इस स्थिति में एयरटेल ने सिर्फ ग्राहक बढ़ाने की होड़ नहीं की, बल्कि अपने आर्थिक ढांचे को बचाने पर ध्यान दिया। बाद में कई छोटे प्रतिद्वंद्वी या तो बाजार से बाहर हो गए या बड़े खिलाड़ियों में समाहित हो गए।

माजेटी ने कहा, “एयरटेल ने जब जियो आया, तब एक स्पष्ट सोच के साथ कुछ ग्राहकों को छोड़ने का निर्णय लिया। ऐसे समय में आपको सही फैसले लेने होते हैं।”

इंस्टामार्ट और यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार

माजेटी के अनुसार, स्विग्गी को इस रणनीति का फायदा भी मिल रहा है। कंपनी का दावा है कि इंस्टामार्ट के यूनिट इकॉनॉमिक्स में पिछले चार तिमाहियों में लगभग 5 से 6 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।

इसके साथ ही, मार्च तिमाही में फूड डिलीवरी ग्रोथ भी पिछले करीब चार वर्षों में सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी केवल बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारी छूट और ऑर्डर खरीदने जैसी रणनीति अपनाती है, तो इससे लंबे समय में उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है।

इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस तेज हो गई है। ब्लिंकिट के सीईओ अल्बिंदर ढींडसा ने दिसंबर में ब्लूमबर्ग न्यूज को बताया था कि भारत का क्विक कॉमर्स सेक्टर आने वाले समय में बड़े बदलावों से गुजरेगा, जहां कमजोर कंपनियां टिक नहीं पाएंगी और फंड जुटाना भी कठिन होता जाएगा।

इंस्टामार्ट पर बढ़ा फोकस और निवेशकों को संदेश

माजेटी ने यह भी कहा कि वह अपना अधिकांश समय अब इंस्टामार्ट बिजनेस पर केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने जेएम फाइनेंशियल की उस रिपोर्ट को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि निवेशकों के लिए सबसे अच्छा विकल्प कंपनी का किसी बड़े खिलाड़ी में विलय या बिक्री हो सकता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा, “अगर हम हारते हैं तो उसकी वजह पूंजी नहीं होगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनी के पास लगभग 15,000 करोड़ रुपये की नकदी मौजूद है, जिससे उसे मजबूती मिलती है।

Advertisement
First Published - May 28, 2026 | 9:15 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement