टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का कहना है कि उसकी आईफोन कंपोनेंट फैक्टरी सभी नियमों का पालन कर रही है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्टरी को अपने पास की कृषि भूमि में कथित रूप से अपशिष्ट पानी छोड़े जाने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
इस बारे में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवक्ता ने कहा, ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जिम्मेदार व्यावसायिक तरीकों और स्थानीय समुदायों और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सूचना मिलते ही हमने एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला के माध्यम से स्वतंत्र जांच कराई। उसमें यह पाया गया कि हम सभी नियामक मानदंडों का पूर्णतः अनुपालन कर रहे हैं। हमने समय पर बोर्ड को अपना जवाब दे दिया है।’
फैक्टरी को चेतावनी दी गई थी कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर यूनिट को बंद करने का नोटिस जारी किया जा सकता है और बिजली आपूर्ति बंद करने जैसे अन्य उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। कंपनी को नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 15 दिन के भीतर जवाब देने का समय दिया गया था। नोटिस 15 मई को जारी किया गया था।
यह फैक्टरी तमिलनाडु के कृष्णागिरि जिले के अय्यारनपल्ली गांव में स्थित है। फैक्टरी से सटी कृषि भूमि के मालिक ने कई बार शिकायत की कि कारखाने से दूषित जल पास के तालाब और उससे सटी खुली भूमि की ओर जाने वाले खुले नाले में छोड़ा जा रहा है। प्रदूषण नियामक ने दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच कई निरीक्षण किए।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि संयंत्र परिसर के भीतर एक तालाब जैसी संरचना में दूषित जल का भंडारण किया जा रहा था, जिससे आसपास के कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहे थे और कुओं का पानी दूषित हो रहा था। नोटिस के अनुसार निरीक्षण और परीक्षणों में पाया गया कि टाटा संयंत्र अपने संयंत्र के भीतर स्थित वर्षा जल संचयन तालाब में दूषित जल छोड़ रहा था, जो ओवरफ्लो होकर आसपास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं के भूजल को दूषित कर रहा था। नोटिस में कहा गया कि हालांकि पिछले साल 24 दिसंबर को बोर्ड ने सुधार की कार्रवाई का सुझाव दिया था, लेकिन टाटा ने कथित तौर पर इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया।