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मुख्य आर्थिक सलाहकार का विजन: ऊर्जा संकट और आर्थिक दिक्कतों का समाधान है ‘उत्पादकता में बढ़ोतरी’

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नागेश्वरन ने कहा कि ऊर्जा व्यवधानों से राजकोषीय और महंगाई का सबसे ज्यादा  असर छोटे किसानों, सूक्ष्म-उद्यमियों और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों पर पड़ता है

Last Updated- April 27, 2026 | 10:50 PM IST
v anantha nageswaran
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन | फाइल फोटो

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता व उच्च ऊर्जा कीमतों के कारण आई आर्थिक दिक्कतों की भरपाई अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में उत्पादकता व प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा व्यवधानों से राजकोषीय और महंगाई का सबसे ज्यादा  असर छोटे किसानों, सूक्ष्म-उद्यमियों और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों पर पड़ता है। अभी भी भारत आयातित जीवाश्म ईंधनों पर भारी निर्भर है जबकि ऊर्जा की मांग पहले ही वैश्विक औसत से लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है।

उन्होंने नीति आयोग के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) 2047 के रोडमैप की रिपोर्ट के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि भारत को डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को न केवल भारत की दीर्घकालिक विकास आशांकाओं को पूरा करने के  उपकरण के रूप में देखना चाहिए बल्कि ‘वितरित आर्थिक मजबूती बनाने के रूप में भी देखना चाहिए। इसकी किसी भी खुली अर्थव्यवस्था को जरूरत होती है जब बाहरी वातावरण प्रतिकूल हो जाए।

केंद्र के आधिकारिक नीति थिंक टैंक ने सोमवार को डीपीआई 2.0 प्रस्तुत किया : यह देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वित्तीय समावेशन से आगे बढ़ाकर कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऋण और ऊर्जा तक विस्तारित करने के लिए दस-वर्षीय प्रयास है। उत्पादकता-केंद्रित डीपीआई 2.0 फ्रेमवर्क का उद्देश्य 2047 तक 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था को हासिल करने के लिए घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यदि यह सफल होता है, तो 2030 तक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान अभी के लगभग 1 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो सकता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘यदि आप विश्वास की लागत कम करते हैं, डेटा को आम लोगों तक पहुंचाते हैं, एआई को भोजपुरी, उड़िया व मराठी में काम करने योग्य बनाते हैं और बाजार लिंक को बंद प्लेटफार्मों के बजाय खुले इंटरऑपरेबल नेटवर्क के माध्यम से जोड़ देते हैं तो आप दशकों में होने वाले विकास को एक दशक में ही हासिल कर सकते हैं।

नीति  आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल समय के साथ सामान्यीकृत हो जाएंगे।

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First Published - April 27, 2026 | 10:19 PM IST

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