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CEA की चेतावनी: डिजिटल बुनियादी ढांचे की राह में कई बाधाएं, साइबर सुरक्षा-डेटा गवर्नेंस का खतरा सामने

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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आगाह किया है कि डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के बावजूद साइबर खतरों और समावेशन की कमी से सरकारी योजनाओं की सफलता पर असर पड़ सकता है

Last Updated- May 08, 2026 | 9:53 PM IST
v anantha nageswaran
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन | फाइल फोटो

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को आगाह किया कि डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की सफलताओं के बावजूद डिजिटल समावेशन, डेटा गवर्नेंस, राज्य इंटरऑपरेबिलिटी और साइबर सुरक्षा संबंधी खतरों से  कल्याणकारी योजनाओं की राजकोषीय दक्षता को खतरा पैदा हो रहा है।

नागेश्वरन ने कहा, ‘डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर चाहे वह कितनी भी परिष्कृत क्यों न हो, पूर्ण अर्थ में डिजिटल समावेशन के समान नहीं है।’ उन्होंने बुजुर्गों, कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों और कम साक्षरता वाले समूहों के लिए अंतिम छोर की बाधाओं पर प्रकाश डाला, जिनकी वजह से सेवाएं पहुंच नहीं पहुंच पातीं।

डीपीआई और सार्वजनिक सेवा डिलिवरी पर इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस (इक्रियर) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में बोलते हुए सीईए ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और भूमि रिकॉर्ड में राज्य-स्तरीय प्रणालियां पिछड़ रही हैं, जिससे केंद्रीय एकीकरण के बावजूद नागरिकों का अनुभव संतोषजनक नहीं है।

उन्होने आगे कहा, ‘बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। प्रमुख चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों को सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है, उन तक वे सबसे आसानी से पहुंच सकें।’ उन्होंने डेटा गवर्नेंस को दूसरी चिंता के रूप में बताया।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवाओं में आंकड़ों को साझा करने का विस्तार करने के लिए भंडारण फ्रेमवर्क की जरूरत है।  नागेश्वरन ने कहा कि राज्यों के बीच इंटर ऑपरेबिलिटी पर  काम प्रगति पर है, क्योंकि केंद्रीय व्यवस्था प्रभावी ढंग से एकीकृत होती हैं, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि रिकॉर्ड और स्थानीय वेलफेयर के लिए राज्य स्तर का बुनियादी ढांचा एकदम अलग अलग है, जिससे नागरिकों की सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।  

उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा पर निरंतर ध्यान देने की जरूरत है,  क्योंकि एक दूसरे से जुड़े सिस्टम में हमले का जोखिम अधिक होता है और खतरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

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First Published - May 8, 2026 | 9:45 PM IST

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