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कौशिक बसु का सुझाव: अति-अमीरों पर बढ़े टैक्स की दर, तभी कम होगी देश में आर्थिक असमानता

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पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने सुझाव दिया है कि अति-अमीरों की ऊपरी आय पर उच्च कर लगाकर और उसे गरीबों में बांटकर आर्थिक असमानता कम की जा सकती है

Last Updated- March 20, 2026 | 10:52 PM IST
Inequality
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कौशिक बसु ने कहा कि बढ़ती असमानता से निपटने के लिए अत्यधिक आय पर कर की दर बढ़ाना जरूरी हो सकता है। ऐसा करके निजी उद्यमों की भूमिका को भी कायम रखा जा सकता है। 

बसु ने औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान में आयोजित ‘खंडित विश्व व्यवस्था में हरित औद्योगीकरण और समावेशी विकास’ विषय पर यूएनयू-वाइडर विकास सम्मेलन में कहा कि प्रगतिशील कराधान संरचना अति-अमीरों द्वारा अर्जित सीमांत आय पर काफी अधिक कर लगा सकती है। ऐसी प्रणाली किसी व्यक्ति की संपूर्ण आय पर लागू नहीं होगी बल्कि निश्चित सीमा से ऊपर की आय पर ही लागू होगी और अतिरिक्त कर राजस्व को समाज के गरीब वर्गों में प्रभावी रूप से पुनर्वितरित किया जाएगा।

बसु ने कहा, ‘जब आप अति धनी हो जाते हैं तो आप अधिक कारें और आलीशान घर खरीदने के लिए अधिक आय अर्जित करने की कोशिश नहीं करते। आप बस दूसरे अति धनी व्यक्ति से प्रतिस्पर्धा करते हैं और उसे हराना चाहते हैं। यदि कराधान प्रणाली में सापेक्ष रैंकिंग अपरिवर्तित रहती है तो प्रतिस्पर्धा की भावना बिल्कुल वैसी ही बनी रहती है, लेकिन यह निचले स्तर पर होती है।’ उन्होंने कहा कि ऐसी संरचना निजी उद्यम के लिए प्रोत्साहन को कमजोर किए बिना अत्यधिक असमानता को कम कर सकती है।

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First Published - March 20, 2026 | 10:52 PM IST

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