पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने ऊर्जा के वैश्विक बाजारों की कमजोरी उजागर कर दी है। इसकी वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव कहा कि इसकी वजह से भारत की मजबूत वृद्धि में ऊर्जा सुरक्षा की भूमिका भी रेखांकित हुई है व भारत के हरित औद्योगीकरण की कवायद रणनीतिक जरूरत के रूप में उभरी है।
इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में ‘ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेसन ऐंड इनक्लूसिव ग्रोथ इन ए फ्रैक्चर्ड वर्ल्ड ऑर्डर’पर आयोजित यूएनयू-डब्ल्यूआईडीईआर डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए देव ने इस बात पर जोर दिया कि भू-राजनीतिक बिखराव, बहुध्रुवीय वैश्विक दुनिया के उदय, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) जैसी कमजोर बहुपक्षीय संस्थाओं को देखते हुए आत्मनिर्भर हरित विनिर्माण की जरूरत बढ़ गई है।
देव ने कहा कि वैश्विक औद्योगिक नीति के नए तरीके से उभरने की प्रतिक्रिया के तौर पर भारत का ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान सामने आया है। इसके तहत हस्तक्षेप 2012 के 52 की तुलना में 2022 में बढ़कर 1,500 हो गया। इसका मुख्य जोर आयात प्रतिस्थापन के बजाय प्रतिस्पर्धी निर्यात पर है।
भारत की व्यापक आर्थिक मजबूती इस बदलाव की वजह से है। इसकी वजह से ही वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा, ‘खास बात यह है कि वृद्धि की यह गति केवल चक्रीयनहीं है, बल्कि यह आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। साथ ही यह राजकोषीय विवेक, समावेशी विकास और उत्पादकता बढ़ाने वाले सुधारों के बीच संतुलन बनाने के प्रयास को भी दिखाती है।’इसकी वजह से निकट अवधि के हिसाब से भारत में उच्च वृद्धि दर बनी रहेगी।