देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि मार्च में पांच महीने के निचले स्तर 4.1 फीसदी पर आ गई। यह फरवरी के संशोधित 5.1 फीसदी से 100 आधार अंक कम है। इसका कारण विनिर्माण और बिजली क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन को माना जा रहा है, जो पश्चिम एशिया संकट के शुरुआती प्रभाव को दर्शाता है। ये आंकड़े मंगलवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी किए गए।
समग्र औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी की बात करें तो यह फरवरी के 158.8 से बदलकर मार्च में 173.2 हो गया। साल दर साल विनिर्माण जो आईआईपी में 78 फीसदी हिस्सेदारी रखता है वह मार्च में 4.3 फीसदी बढ़ा जो पांच महीनों का निचला स्तर है। फरवरी में यह 5.9 फीसदी था। पूरे वित्त वर्ष 26 के लिए विनिमार्ण क्षेत्र 5 फीसदी बढ़ा जबकि वित्त वर्ष 25 में इसने 4.1 फीसदी की वृद्धि हासिल की थी।
क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे के अनुसार मार्च के आंकड़े अनिश्चितता के केवल एक हिस्से को ही दर्शाते हैं और कमजोर उत्पादक भावना उत्पादन आंकड़ों में अभी पूरी तरह नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कहीं अधिक गहरा असर नजर आएगा।
मार्च में बिजली उत्पादन वृद्धि घटकर चार महीने के निचले स्तर 0.8 फीसदी पर आ गई, जबकि फरवरी में इसमें 2.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। इससे वित्त वर्ष26 के लिए इस क्षेत्र की वृद्धि मात्र 1 फीसदी रह गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 5.2 फीसदी थी। दूसरी ओर, खनन उत्पादन 5.5 फीसदी बढ़ा, जो फरवरी में दर्ज 3.1 फीसदी से अधिक है। वित्त वर्ष 26 में खनन उत्पादन 1.4 फीसदी बढ़ा है, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह वृद्धि 3 फीसदी रही थी।
अंतिम उपयोग के आधार पर, मार्च में छह आईआईपी के तीन क्षेत्रों ने पिछले महीने की तुलना में वर्ष दर वर्ष गिरावट दर्ज की।सबसे तेज गिरावट मध्यवर्ती वस्तुओं के क्षेत्र में दर्ज की गई, जिसका उत्पादन फरवरी में 7.2 फीसदी की वृद्धि के बाद मार्च में 54.1 फीसदी घटकर 3.3 फीसदी पर आ गया। अधोसंरचना/निर्माण वस्तुओं का उत्पादन 6.7 फीसदी बढ़ा, जो पिछले महीने दर्ज दो अंकों की 11.1 फीसदी वृद्धि से कम है।
टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में वृद्धि फरवरी के 7.1 फीसदी से घटकर 5.3 फीसदी पर आ गई। दूसरी ओर, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं की उत्पादन वृद्धि मार्च में 1.1 फीसदी रही, जबकि पिछले महीने यह 0.5 फीसदी ऋणात्मक थी। प्राथमिक वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं ने भी माह के दौरान साल दर साल प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया।
छह श्रेणियों में से चार ने वित्त वर्ष 26 में अपने प्रदर्शन में वृद्धि दर्ज की। इनमें पूंजीगत वस्तुएं, मध्यवर्ती वस्तुएं, अधोसंरचना/निर्माण वस्तुएं और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएं शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि 4.1 फीसदी रही, जो वित्त वर्ष 25 में दर्ज 4 फीसदी से थोड़ी अधिक है।
एनएसओ द्वारा ट्रैक किए गए 23 प्रमुख विनिर्माण खंडों में से 14 ने मार्च में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जिनमें खाद्य उत्पाद, कागज और कागज उत्पाद, औषधियां, गैर-धातु खनिज उत्पाद और मूल धातुएं शामिल हैं। इनमें से तीन यानी मशीनरी और उपकरण, मोटर वाहन और अन्य परिवहन उपकरण ने माह के दौरान दो अंकों की वृद्धि दर्ज की।
दूसरी ओर, नौ क्षेत्रों ने कमी दर्ज की, जिनमें रसायन और रासायनिक उत्पाद, पेय पदार्थ, तंबाकू उत्पाद शामिल हैं। परिधान क्षेत्र में सबसे ज्यादा 14.6 फीसदी की कमी आई। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, ‘आगे की बात करें तो मुद्रास्फीति में वृद्धि और आईटी क्षेत्र में कमजोर भर्ती से शहरी खपत जोखिम का सामना कर रही है।’