पश्चिम एशिया के संघर्ष को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत को कुशलता से अपने राजकोषीय बफर्स का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। आईएमएफ के एशिया प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्ण श्रीनिवासन ने गुरुवार को कहा कि लंबे समय तक संघर्ष की स्थिति में ऊर्जा संकट का दबाव बढ़ने का जोखिम है।
एशिया-प्रशांत आर्थिक आउटलुक पर संवाददाताओं को जानकारी देते हुए श्रीनिवासन ने पश्चिम एशिया में काम कर रहे लोगों से भारत में आने वाले की रफ्तार बने रहने का उल्लेख किया और थोड़े बढ़े वृद्धि अनुमान पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय कमजोरियों और फालतू के खर्च को लेकर आगाह भी किया।
आईएमएफ ने मंगलवार को जनवरी के आउटलुक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के पहले के अनुमान को 10 आधार अंक बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले 6.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था। आईएमएफ को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रतिकूल प्रभाव को भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने से होने वाले लाभ से बल मिलेगा।
श्रीनिवासन ने आगे कहा, ‘हम लक्षित समर्थन के सिद्धांत पर जोर दे रहे हैं। यह उन लोगों पर लक्षित हो, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। उन फर्मों के लिए लक्षित हैं जो व्यवहार्य हैं। इसलिए अपने बफर्स का विस्तार इस तरह से करें कि आप इसे उन लोगों को दें, जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है।’