अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अपने अनुमान को 10 आधार अंक बढ़ाकर आज 6.5 फीसदी कर दिया। जनवरी में जारी अपने अनुमान में आईएमएफ ने 6.4 फीसदी वृद्धि दर रहने का अनुमान लगाया था। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह भारतीय सामान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी शुल्क का घटकर 10 फीसदी के करीब हो जाना है। आईएमएफ का मानना है कि अमेरिकी शुल्क में कमी से होने वाला लाभ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के प्रतिकूल असर की भरपाई से कहीं अधिक होगा।
नए अनुमान से वित्त वर्ष 2026 में अपेक्षित 7.6 फीसदी की बढ़त की तुलना में काफी कमी आने का संकेत मिलता है। आईएमएफ का मानना है कि पिछले साल की स्थिति वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजों और चौथी तिमाही में बनी रही मजबूत गति को दर्शाती है। हालांकि आईएमएफ का वित्त वर्ष 2027 के लिए वृद्धि दर अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.9 फीसदी और विश्व बैंक के 6.6 फीसदी अनुमान से कम है।
आईएमएफ के अनुसार भारत के विकास की गति स्थिर रहने की उम्मीद है जिसमें वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 दोनों में जीडीपी 6.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी। इसका मुख्य कारण वित्त वर्ष 2026 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और बाहरी परिस्थितियों में आया सुधार है। आईएमएफ ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष भारत की वृद्धि दर पहले के अनुमान से कहीं अधिक रही जिससे नए वित्त वर्ष के लिए वृद्धि की शुरुआत का स्तर और भी ऊंचा हो गया है।
वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है जो जनवरी के 3.3 फीसदी के अनुमान से 20 आधार अंक कम है। उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटकर 3.9 फीसदी रह सकती है जो वित्त वर्ष 2026 के लिए अनुमानित 4.4 फीसदी वृद्धि दर से कम है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का वृद्धि दर पर अलग-अलग असर पड़ रहा है क्योंकि भौगोलिक निकटता, वित्तीय प्रवाह, धनप्रेषण और ऊर्जा पर निर्भरता के मामले में इन देशों की स्थिति अलग-अलग है।
कुल मिलाकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में इन देशों पर पश्चिम एशिया संकट का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। इससे वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर में संघर्ष-पूर्व के 4.2 फीसदी के अनुमान की तुलना में 30 आधार अंक की कमी आ सकती है। आईएमएफ ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया संघर्ष लंबे समय तक चला तो जोखिम ज्यादा बढ़ सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि भारत सहित दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया की कई अर्थव्यवस्थाओं में पश्चिम एशिया में हो रही उथल-पुथल के कारण पर्यटन और धनप्रेषण में कमी आ सकती है जिससे घरेलू मांग कमजोर पड़ेगी। महंगाई के मामले में आईएएमफ का अनुमान है कि भारत में खुदरा मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2026 में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई गिरावट के बाद अपने लक्ष्य स्तर 4.7 फीसदी के करीब वापस आ जाएगी।
आईएमएफ का मानना है कि व्यापार वार्ताओं में ठोस प्रगति से शुल्क कम हो सकते हैं और वैश्विक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। उसने कहा, ‘इससे नीतिगत अनुमान भी बेहतर हो सकता है जिससे कारोबारी बेहतर योजना बना सकेंगे और निवेश योजनाओं को आगे बढ़ा सकेंगे।’