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नई जीडीपी सीरीज में सरकारी आवास सुविधा को वेतन का हिस्सा माना जाएगा, PFCE में भी जोड़ा जाएगा

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रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022-23 का घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीइएस) वस्तु के अनुसार निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) का राष्ट्रीय मानक तय करेगा।

Last Updated- February 20, 2026 | 9:30 AM IST
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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) देश में परिवारों के खपत रुझान को और विस्तार से समझने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तहत नई श्रेणी लाने की तैयारी कर रहा है। इस नई श्रृंखला में वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष बनाया जाएगा। यह जानकारी जीडीपी में पद्धतिगत सुधारों पर बनी उप-समिति की रिपोर्ट में दी गई है जिसे एनएसओ ने बुधवार को जारी किया है।

उदाहरण के तौर पर, अब मक्खन और घी को ‘तेल एवं वसा’ नाम की नई श्रेणी में रखा गया है, जबकि आइसक्रीम को ‘चीनी और उससे बनी मिठाइयों’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। पहले वर्ष 2011-12 की जीडीपी श्रृंखला में ये सभी चीजें ‘दूध और इससे बने उत्पाद’ की श्रेणी के अंतर्गत शामिल थीं। ये बदलाव संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग की सिफारिशों के अनुसार उपभोग के उद्देश्य के अनुसार व्यक्तिगत वर्गीकरण, 2018 (सीओआईसीओपी) के साथ तालमेल बिठाने के लिए किए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022-23 का घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीइएस) वस्तु के अनुसार निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) का राष्ट्रीय मानक तय करेगा। इसी के आधार पर तिमाही हिस्सेदारी भी निकाली जाएगी।

उप समिति की रिपोर्ट के मुताबिक नई श्रृंखला में केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाली सरकारी आवास सुविधा को भी उनके वेतन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में जोड़ा जाएगा। इसका मूल्यांकन ‘उत्पादन लागत पद्धति’ से किया जाएगा। इसके तहत सरकारी मकानों की सालाना टूट-फूट तथा उनकी मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च को जोड़कर आवास सेवा का मूल्य तय किया जाएगा।
इस तरह से गणना किए गए आवास सेवा का मूल्य को निजी अंतिम उपभोग व्यय में शामिल किया जाएगा।

यह तरीका उन सरकारी कर्मचारियों के वेतन का सही आकलन करने के लिए अपनाया गया है जिन्हें आवास किराया भत्ता (एचआरए) के बजाय सरकारी आवास मिलता है। यह 2011-12 की वर्तमान श्रृंखला से अलग है जिसमें इस तरह का कोई आकलन नहीं किया जाता था।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस बदलाव से न केवल इन कर्मचारियों का मुआवजा सही तरीके से दर्ज होगा बल्कि सरकार द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का मूल्यांकन भी सामान्य सरकारी उत्पादन के अनुमानों में सही रूप से प्रतिबिंबित होगा।’

असंगठित क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) का अनुमान अब असंगठित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) और सामयिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़ों के आधार पर लगाया जाएगा। साथ ही, तिमाही खातों में अन्य खर्च के घटकों की गणना में भी सुधार किए जाएंगे जो प्रशासनिक आंकड़ों के और करीब होंगे।

सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) का अनुमान केंद्र और राज्य सरकारों के तिमाही राजस्व खर्च से निकाला जाएगा, जिसमें ब्याज और अनुदान घटा दिए जाएंगे। सार्वजनिक प्रशासन और रक्षा क्षेत्र का जीवीए मुख्य रूप से कर्मचारियों के वेतन के आधार पर तिमाही में बांटा जाएगा और इसमें प्रमुख वेतन नीति बदलावों के लिए समायोजन भी किए जाएंगे।

वस्तुओं के भंडार में बदलाव अब केवल कृषि, विनिर्माण और खनन के साधारण औसत वृद्धि के आधार पर नहीं निकाला जाएगा। इसके बजाय इसे व्यापक उद्योग के भंडार संकेतकों के आधार पर तैयार किया जाएगा, जिसमें सूचीबद्ध कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणाम भी शामिल होंगे। साथ ही, कीमती वस्तुओं का अनुमान अब सिर्फ सोना और चांदी से नहीं, बल्कि अधिक व्यापक कीमती वस्तुओं के शुद्ध आयात के आधार पर लगाया जाएगा।

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First Published - February 20, 2026 | 9:30 AM IST

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