भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2027 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 100 अरब डॉलर से ज्यादा आने की उम्मीद है। इसके लिए उन्होंने मजबूत निवेश गतिविधियों को हवाला दिया। मौद्रिक नीति के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुप्ता ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में कुल एफडीआई 95 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इससे पता चलता है कि विदेशी पूंजी का आना मजबूत बना रहेगा और इस साल यह 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है।
गुप्ता ने कहा, ‘निजी पूंजी के आंकड़े असल में बहुत अच्छे रहे हैं। जीडीपी के मुकाबले निवेश का अनुपात ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इसलिए ये आंकड़े अच्छे बने हुए हैं। अगर हम भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) की बात करें, तो 2025-26 में सकल एफडीआई निवेश 95 अरब डॉलर था और इस साल यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है। निश्चित रूप से, यह 100 अरब डॉलर के पार और यहां तक कि 110 अरब डॉलर, 120 अरब डॉलर भी हो सकता है। यह एक निरंतर बढ़ोतरी है, जिसका मतलब है कि यह सिर्फ एक साल का मामला नहीं है। आने वाले वर्षों में एफडीआई के जरिये और ज्यादा निवेश देखने को मिलेगा।’
वित्त वर्ष 2026 में सकल एफडीआई आवक 17 फीसदी बढ़कर 95 अरब डॉलर रही। शुद्ध एफडीआई फरवरी 2026 में ध त्मक हो गया। इससे पहले लगातार 6 महीने तक इस पर दबाव रहा। मार्च में शुद्ध एफडीआई प्रवाह 1.57 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले दर्ज की गई 50.2 करोड़ डॉलर की निकासी के उलट था। लेकिन यह फरवरी के स्तर से कम था।
सकल प्रवाह में मजबूती के बावजूद विदेशी निवेशकों के पैसा वापस ले जाने और भारतीय कंपनियों का विदेश में निवेश बढ़ने के कारण शुद्ध एफडीआई कमजोर बना हुआ है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘सकल एफडीआई का आंकड़ा बहुत शानदार रहा है और हो सकता है कि इस साल यह 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाए। अहम बात यह है कि वापस आने वाली रकम कितनी रहती है। एक तीसरा पहलू यह भी है कि भारतीय कंपनियों ने विदेश में अपना निवेश बढ़ाया है, चाहे अपनी सहायक कंपनियों में हो या फिर वहां दूसरी कंपनियों को खरीदने के लिए। इसलिए शुद्ध आंकड़ा, जो ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ के नजरिये से सबसे जरूरी है, पिछले दो साल से 10 अरब डॉलर से भी कम रहा है, जो कि काफी कम है।’
पिछले पांच साल में भारत में एफडीआई का आना एक चक्र की तरह रहा है। वित्त वर्ष 2022 में तेजी से बढ़ने के बाद वित्त वर्ष 2023 में वैश्विक मंदी, ऊंची ब्याज दरों और भूराजनीतिक अनिश्चितता के कारण इसमें कमी आई। वित्त वर्ष 2022 में 83.57 अरब डॉलर के मुकाबले वित्त वर्ष 2023 में कुल एफडीआई आवक घटकर 71.36 अरब डॉलर रह गई।