भारत के औद्योगिक गतिविधि के मासिक आकलन में सोमवार से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दरअसल, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की नई श्रृंखला पेश कर रहा है। इसमें आधार वर्ष को 2011-12 की श्रृंखला से संशोधित करके 2022-23 (वित्त वर्ष 23) कर दिया जाएगा। आधार वर्ष 2011-12 का एक दशक से अधिक समय से उपयोग हुआ है। नवीनतम संशोधन सूचकांक के इतिहास में 10वां है। इससे ‘अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों, तकनीकी प्रगति, और नए उद्योगों और उत्पादों के विकास को दर्शाने’ की उम्मीद है।
नई श्रृंखला की प्रमुख विशेषता पारंपरिक खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों से परे विस्तार है। पहली बार संशोधित आईआईपी में गैस आपूर्ति और जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन को शामिल करने का प्रस्ताव है जबकि खनन का लघु खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों तक विस्तारित किया गया है। यह नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय बिजली उत्पादन, ईंधन खनिजों, धातु खनिजों, गैर-धातु खनिजों, गैस आपूर्ति और जल व अपशिष्ट सेवाओं के लिए अलग-अलग सूचकांक प्रकाशित करके अधिक बारीक जानकारी भी प्रदान करेगा।
सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार आधार वर्ष को संशोधित करने से यह तय होता है कि आईआईपी वर्तमान उत्पादन पैटर्न का सटीक रूप से प्रतिनिधित्व करता है। यह आर्थिक विश्लेषण व नीति-निर्माण के लिए अधिक विश्वसनीय आंकड़े प्रदान करता है। यह संशोधन इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) जैसे अन्य प्रमुख मैक्रोइकनॉमिक संकेतकों के अनुरूप है, जो वित्त वर्ष 23 को एंकर वर्ष के रूप में साझा करते हैं।
यह कदम जीडीपी और डब्ल्यूपीआई श्रृंखला को इस वर्ष की शुरुआत में आमूलचूल बदलाव किए जाने के महीनों बाद आया है। पुरानी श्रृंखला में 407 की तुलना में बास्केट को 463 उत्पाद समूहों तक विस्तारित किया गया है। इसमें 120 नए उत्पाद समूह जोड़े गए और 64 हटा दिए गए।
नई प्रस्तुतियों में चुंबकीय स्ट्रिप्स वाले कार्ड, क्लोज्ड सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) कैमरे, गैर-बुने हुए वस्त्र, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, पशु चिकित्सा के अलावा स्टेंट और टीके शामिल हैं। इस बास्केट से मिट्टी का तेल, फ्लोरोसेंट ट्यूब और कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप (सीएफएल) और कुछ टायर ट्यूब को हटा दिया गया है।
प्रमुख पद्धतिगत बदलाव में नई श्रृंखला में एनईसी (जहां वर्गीकृत नहीं है) श्रेणी से विनिर्माण वस्तुओं को शामिल किया गया है। यह वित्त वर्ष 12 श्रृंखला के विपरीत है। इसने ऐसी वस्तुओं को चयन फ्रेम से बाहर रखा था और उद्योग समूह में अन्य वस्तुओं में उनके उत्पादन को पुनर्वितरित किया था।
नई आईआईपी श्रृंखला में एनईसी वस्तुओं को बरकरार रखा गया है। फील्ड अधिकारियों ने इन श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले विशिष्ट उत्पादों की पहचान करने के लिए कारखानों का दौरा किया है। इससे सूचकांक का दायरा अधिक बढ़ गया।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने उत्पाद चयन के तर्क को भी कड़ा कर दिया है। विनिर्माण के लिए बास्केट को वित्त वर्ष 22 और वित्त वर्ष 23 के लिए वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई) आंकड़े का उपयोग करके तैयार किया गया है। अन्य क्षेत्रों के लिए बास्केट भारतीय भूविज्ञान ब्यूरो (इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस) जैसे संबंधित एजेंसियों के साथ मापनीय आउटपुट और परामर्श पर आधारित है।
दरअसल अखिल भारतीय आईआईपी के आधार वर्ष पुनरीक्षण के लिए तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी-आईआईपी) ने आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) के परिचालन में आने के बाद डब्ल्यूपीआई-आधारित डिफ्लेटर को बदलने का आह्वान किया है। इससे निश्चित रूप से डब्ल्यूपीआई एक अंतरिम उपाय के रूप में जारी रहेगा। लिहाजा समिति ने डिफ्लेटर में संशोधन किया।
समिति ने ज्यामितीय पद्धति का उपयोग करके क्षेत्रीय स्तर पर लिंकिंग कारक, बंद होने और लाइन परिवर्तन को संबोधित करने के लिए आवधिक कारखाने प्रतिस्थापन की सिफारिश की है। फिर श्रृंखला समय पर्याप्त लंबी और स्थिर होने पर श्रृंखला-जुड़े और मौसमी रूप से समायोजित संस्करणों पर विचार करने का आग्रह किया है।