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India-US trade deal: निर्यात बढ़ने और स्थिरता की आस, सरकार के अनुमान से ज्यादा तेज बढ़ सकती है अर्थव्यवस्था

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आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष 27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है

Last Updated- February 03, 2026 | 10:14 PM IST
Growth
इलस्ट्रेशन- अजय मोहंती

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से निर्यात को बढ़ावा मिलने और अर्थव्यवस्था में अधिक स्थिरता आने की उम्मीद है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार इसकी वजह से अगले वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 20 से 40 आधार अंकों की वृद्धि हो सकती है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिका के भारतीय उत्पादों पर शुल्क में पर्याप्त कमी करने से देश की अर्थव्यवस्था सरकार के पहले के अनुमान से भी अधिक तेजी से बढ़ सकती है। उन्होंने ब्लूमबर्ग से बातचीत के दौरान कहा, ‘हम संभवतः इस वर्ष 7.4 प्रतिशत वृद्धि के आसपास की संभावना देख रहे हैं…यह मेरा पहला अनुमान हो सकता है, लेकिन मुझे अपने आंकड़ों को दोबारा देखना होगा।’

आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष 27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि नागेश्वरन ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बजट के बाद बताया था कि अगले वित्त वर्ष के वृद्धि अनुमानों में अमेरिका से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना को शामिल नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा था, ‘अगर ऐसा हुआ तो वृद्धि की संभावनाओं को काफी अच्छा बढ़ावा मिलेगा। लेकिन वित्त वर्ष 2027 के लिए हमारे 6.8 से 7.2 के वृद्धि के अनुमान इस पर निर्भर नहीं हैं।’

भारत और अमेरिका सोमवार को ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर राजी हो गए। इसके तहत अमेरिका भारत पर लगाए गए शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।

इस बारे में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में निदेशक एन आर भानुमूर्ति ने कहा, ‘इस व्यापार समझौते से आगामी वित्तीय वर्ष में 0.3 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की उम्मीद है। जीडीपी के अग्रिम अनुमानों में भी कुछ संशोधन होगा। अंतिम तिमाही में काफी व्यापार होता है। इसलिए चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में प्रभाव देखने को मिल सकता है। अभी फरवरी और मार्च में ज्यादातर समय बाकी है। लिहाजा, अधिक सकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं।’

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि समझौते के विवरण का अध्ययन करने की जरूरत है लेकिन शुल्क में 50 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक की महत्त्वपूर्ण कमी होने से लघु और मध्यम उद्यमों और निर्यातकों को लाभ होगा।

सिडबी के मुख्य अर्थशास्त्री सुमन चौधरी ने बताया, ‘अगस्त के बाद प्रतिस्पर्धा में कमी आ गई थी, वह अब फिर बहाल हो रही है… सभी व्यापार समझौतों का संयुक्त प्रभाव निश्चित रूप से सकारात्मक होगा। इसका शुरुआती साल वित्त वर्ष 2027 में प्रभाव बहुत अधिक नहीं होगा – संभवतः 0.2 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि होगी लेकिन अगले तीन से चार वर्षों में यह महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है।’

अर्थशास्त्रियों ने अमेरिका से भारत को आयात बढ़ने को लेकर भी चेताया है।  केनरा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री माधवनकुट्टी जी ने कहा, “आखिरकार, अमेरिका भारत के साथ व्यापार घाटा कम करना चाहता है। अगर इस समझौते से हमारा व्यापार घाटा बढ़ता है तो वृद्धि पर इसका सकारात्मक प्रभाव अनिश्चित होगा। ऐसी स्थिति में रुपया और भी कमजोर हो सकता है।’

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘व्यापार समझौते के विवरण, छूट प्राप्त क्षेत्रों, आयात शुल्क में कटौती आदि की प्रतीक्षा का इंतजार है। ऐसे में अभी आंकड़ों में संशोधन करना जल्दबाजी होगी लेकिन इस समझौते के बाद वित्त वर्ष 2027 के अंत तक के हमारे 6.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान में बढ़ोतरी की संभावना है।”

हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि जब व्यापार समझौता नहीं हुआ था, तब उसका प्रतिकूल प्रभाव बहुत अधिक नहीं पड़ा था। इसलिए जीडीपी के आंकड़ों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। 15वें वित्त आयोग के सचिव अरविंद मेहता ने कहा, ‘अभी तक कुछ निर्यातक अन्य बाजारों में भी अपने कारोबार का विस्तार कर चुके हैं।’

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First Published - February 3, 2026 | 10:08 PM IST

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