भारत का थोक मूल्य सूचकांक मई में बढ़कर 9.68 प्रतिशत हो गया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के पहले संशोधित सूचकांक के मुताबिक यह नए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक के तहत सर्वाधिक ऊंची दर दर्ज हुई। दरअसल, पश्चिम एशिया संकट ने ईंधन के दामों को बढ़ा दिया और और 2022-23 की श्रृंखला के तहत ऊर्जा खंड रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज हुआ।
मई में थोक महंगाई अप्रैल के 8.26 प्रतिशत से अधिक थी। यह सूचकांक मई में 109.9 अंक बढ़ा और यह 37 महीने की पुरानी श्रृंखला के तहत उच्चतम स्तर पर है। मई में ईंधन महंगाई उछलकर 30.33 प्रतिशत हो गई जबकि यह अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी।
इसके साथ ही मंत्रालय ने भारत की पहली आधिकारिक उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) प्रणाली को भी जारी किया। इसमें एक आउटपुट पीपीआई (वस्तुएं), एक परीक्षण इनपुट पीपीआई (वस्तुएं) और एक सेवा पीपीआई शामिल हैं। मई में आउटपुट पीपीआई 109.6 पर था और यह अप्रैल के 108.6 से अधिक रहा। हालांकि महंगाई 9.38 प्रतिशत रही जो पिछले आंकड़ों की तुलना में सबसे अधिक है।
आउटपुट पीपीआई के चार प्रमुख समूह – कृषि, वानिकी व मत्स्य पालन की महंगाई 4.58 प्रतिशत, खनन और उत्खनन की महंगाई 18.97 प्रतिशत, विनिर्मित उत्पाद की महंगाई 11.28 प्रतिशत और बिजली की महंगाई -1.96 प्रतिशत दर्ज की गई। इस क्रम में विनिर्माण का परीक्षण इनपुट पीपीआई मई में 104.9 रहा था। यह अप्रैल की तुलना में तथावत था लेकिन मार्च के 100.9 से अधिक था।
इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने बैंकिंग, प्रतिभूति, लेन देन, बीमा, पेंशन फंड मैनेजमेंट, रेलवे, हवाई यात्री सेवा और टेलीकॉम जैसी सात सेवाओं के लिए तिमाही सर्विस पीपीआई जारी किया। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही) के लिए बैंकिंग सर्विस के योगदान का सूचकांक सबसे ज्यादा 129.7 था जबकि प्रतिभूति लेनदेन का सूचकांक सबसे कम 91.7 था।
वैसे ईंधन की महंगाई में उछाल ने थोक मूल्य सूचकांक को बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया लेकिन यह प्रमुख समूहों में व्यापक आधार पर देखा गया। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई मई में बढ़कर 4.99 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.78 प्रतिशत थी। वहीं, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 6.68 प्रतिशत थी।
इस समूह में आधार धातुओं, रसायनों, वस्त्रों और बिजली के उपकरणों में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उच्च लागतें शामिल हैं जो जरूरी नहीं कि कच्चे तेल से जुड़ी हों।’ आंकड़ों से यह भी पता चला है कि खाद्य सूचकांक 16 महीने के उच्च स्तर 4.49 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 3.11 प्रतिशत था।