प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध भारत की राजकोषीय अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और तेल बाजार पर असर डालेगा, भले ही संघर्ष जल्द समाप्त हो जाए।
नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के स्वर्ण जयंती सम्मेलन के दौरान बोलते हुए देव ने कहा कि संघर्ष का प्रभाव तुरंत गायब नहीं होगा, क्योंकि तेल उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर होने में समय लगेगा।
उन्होंने कहा, ‘अगर युद्ध रुक भी जाता है तो तेल उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर होने में कुछ समय लगेगा। हम निकट भविष्य में 69 डॉलर प्रति बैरल पर वापस नहीं जा सकते हैं।’
देव ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति फिलहाल झटके का सामना करने के लिए काफी मजबूत है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि कच्चे तेल की कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि और महंगाई दर दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। पिछले अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल तक रहता है तो वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत की सीमा में बनी रह सकती है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच जाती हैं तो महंगाई दर के लिए नए सिरे से अनुमान की जरूरत होगी।
देव ने कहा कि बार बार के वैश्विक झटकों को देखते हुए भारत को ढांचागत जोखिम प्रबंधन तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने अनुरोध किया कि सरकार को अर्थव्यवस्था के व्यवधान के प्रमुख महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को चिह्नित करने की जरूरत है, जो ऊर्जा, खाद्यान्न और उर्वरक क्षेत्र में बनते हैं और भले ही कम अवधि के हिसाब से वृद्धि पर असर पड़े लेकिन इसके लिए रणनीतिक भंडार बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘हमें और अधिक बफर्स, यहां तक कि पेट्रोलियम भंडार भी चाहिए। निश्चित रूप से इसके विविधीकरण की भी जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा में मध्यम अवधि के बदलाव से भारत की तेल की कीमतों में अस्थिरता की समस्या हल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताओं का दो-तिहाई काम समय से 4 साल पहले पूरा कर चुका है।
देव ने शुल्क से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों का समर्थन करने, मुक्त व्यापार समझौतों में तेजी लाने और निर्यात बाजारों में विविधता लाने की सरकार की रणनीति का समर्थन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते से एमएसएमई सहित भारतीय निर्यातकों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं, जिस पर अभी बातचीत चल रही है।
उन्होंने कोविड के बाद संकटों के प्रबंधन में भारत की संस्थागत तैयारी में हुए सुधारों की सराहना की और इस दिशा में सरकार के आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना जैसे सरकार के उठाए गए कदमों का उल्लेख किया।