राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने गुरुवार को सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) के संकलन के लिए एक समान दिशानिर्देश अधिसूचित किया है, जिसमें 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया गया है। यह कदम राज्य-स्तरीय आर्थिक अनुमानों को अधिक सटीक, तुलना योग्य और अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना के साथ बेहतर ढंग से तालमेल करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस समय लक्षद्वीप और दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव को छोड़कर 34 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 2011-12 के आधार वर्ष के साथ जीएसडीपी अनुमान एकत्र कर रहे हैं। 2022-23 के आधार वर्ष वाली नई श्रृंखला में सांख्यिकी मंत्रालय सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, जिनमें लक्षद्वीप और दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव शामिल हैं, को क्षेत्रीय खातों के आंकड़ों के संकलन में पूर्ण राष्ट्रीय कवरेज और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए शामिल करने का प्रयास कर रहा है।
अन्य प्रमुख बदलावों में नई श्रृंखला में कई क्षेत्रों में सिंगल डिफ्लेशन मेथड को छोड़ दिया गया है। इसकी जगह स्थिर मूल्य अनुमानों के लिए पुनर्मूल्यांकन, डबल डिफ्लेशन और वॉल्यूम एक्सट्रापोलेशन की सिफारिश की गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि इससे इनपुट और आउटपुट की कीमतों में अंतर होने के कारण होने वाली खामियों कम करके वास्तविक उत्पादन के मापन में सुधार होगा।
संशोधित ढांचे में कृषि, खनन, विनिर्माण, निर्माण, बिजली, परिवहन, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भी मानकीकरण किया गया है। राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भीतर आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिए जीएसवीए एक प्रमुख संकेतक है। यह सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मापन में भूमिका निभाता है, जो क्षेत्रीय आर्थिक प्रदर्शन के लिए उपयोग किया जाने वाला मुख्य मापक है।
दस्तावेज से पता चलता है कि संशोधित जीएसवीए ढांचा प्रशासनिक और सर्वे आंकड़ों परअधिक निर्भर है, जिसमें माल और सेवा कर (जीएसटी), सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस), वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई), असंगठित क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (एयूएसईई), आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस), घरेलू उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) और क्षेत्र-विशिष्ट रिकॉर्ड शामिल हैं। इसमें उन क्षेत्रों के लिए प्रत्यक्ष राज्य-स्तरीय अनुमानों के उपयोग का भी विस्तार किया गया है, जहां राज्य-स्तरीय आंकड़े अधूरे रहते हैं।