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कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो भारत पर कितना पड़ेगा असर? अर्थशास्त्रियों ने बताया

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अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि तेल कीमतों में उछाल, कमजोर निर्यात और कम प्रेषण से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है

Last Updated- May 12, 2026 | 8:07 AM IST
Crude Oil Prices

भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्त वर्ष 2026-27 में उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, धन प्रेषण पर दबाव पड़ रहा है और निर्यात वृद्धि कमजोर हो रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बड़ा जोखिम पूंजी खाते की ओर भी हो सकता है। सीएडी के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.5 प्रतिशत से लेकर 2.4 प्रतिशत तक रहने के अनुमान लगाया जा रहा है।

क्रिसिल ने सोमवार को वित्त वर्ष 2026 में सीएडी के जीडीपी के 0.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में 2.2 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया है। साथ ही, उसने ब्रेंट क्रूड का पूर्वानुमान पहले के 82-87 डॉलर प्रति बैरल से संशोधित कर 90-95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। क्रिसिल ने चेतावनी दी कि तेल, गैस और उर्वरक की ऊंची कीमतें आयात बिल पर और अधिक दबाव डालेंगी।

क्रिसिल की भारत संबंधी नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चले संघर्ष और इसके कारण तेल व गैस उत्पादन तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों में आई बाधा से क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी। परिणामस्वरूप, भारत को पश्चिम एशिया से आने वाले प्रेषण पर भी असर पड़ सकता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने मई की शुरुआत में कहा था कि यह संघर्ष भारत के लिए बहु-आयामी वृहद आर्थिक चुनौती पैदा करता है जिससे चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 26 में 1 प्रतिशत से कम से बढ़कर वित्त वर्ष 27 में जीडीपी के 2 प्रतिशत से अधिक तक जा सकता है।

फिलहाल, अर्थशास्त्रियों का व्यापक मत है कि वित्त वर्ष 27 बाहरी खाते के लिए वित्त वर्ष 26 की तुलना में कठिन वर्ष साबित हो रहा है। उनके मुताबिक सीएडी का सटीक आंकड़ा कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि पर निर्भर करेगी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि वित्त वर्ष 27 में चालू खाता घाटा 1.5-2 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। इसका कारण व्यापक व्यापार घाटा और खाड़ी देशों से कम प्रेषण होगा। उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन हमें आईटी जैसी सेवाओं के निर्यातकों से कुछ सहारा मिल रहा है।’

सबनवीस ने कहा कि अल्पावधि में भारत ऐसे बाहरी प्रवाहों को संतुलित करने के लिए बहुत काम कर सकता है और असली दबाव पूंजी खाते पर है न कि केवल चालू खाते पर। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस तरह के माहौल में एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) को वापस लाने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है।’

इसी तरह येस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पाल ने कहा कि मौजूदा बहस चालू खाता घाटे पर बहुत अधिक केंद्रित है, जबकि असली जोखिम पूंजी खाते में है। उन्होंने कहा, ‘आज की बड़ी चिंता यह है कि भारत को पर्याप्त सकल एफडीआई प्रवाह मिलते रहने के बावजूद, शुद्ध प्रवाह बेहद कमजोर हैं क्योंकि बड़े पैमाने पर पुनर्प्रेषण हो रहा है।’ उन्होंने जोड़ा कि नीति प्रतिक्रियाएं चालू खाते के दबाव को खपत पर अंकुश लगाकर कम करने की बजाय पूंजी प्रवाह सुधारने पर केंद्रित होनी चाहिए।

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज ने अपेक्षाकृत हल्का लेकिन चिंताजनक अनुमान दिया है, जिसमें वित्त वर्ष 27 में सीएडी/ जीडीपी को 1.7 प्रतिशत पर रखा गया है, जब ब्रेंट का औसत मूल्य 80 डॉलर प्रति बैरल माना गया है। पहले यह 1.3 प्रतिशत था जब ब्रेंट 70 डॉलर पर अनुमानित था। कंपनी ने कहा कि ब्रेंट में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि घाटे को 0.45 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकती है।

केनरा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री माधवन जी. कुट्टी ने कहा, ‘कच्चे तेल पर प्रतिकूल झटका, जो युद्धविराम होने पर भी 100 से 110 डॉलर के बीच रह सकता है, और माल निर्यात में 10 प्रतिशत की गिरावट के साथ चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 27 में 1.8 से 1.9 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार की टिप्पणी ने बहस में एक नया पहलू जोड़ दिया जब उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच राष्ट्रीय हित में परिवारों से एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीद टालने का आग्रह किया। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन किया, क्योंकि बढ़ते बुलियन आयात भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

थिंक टैंक ने सरकार से भारत-यूएई व्यापार समझौते के तहत कीमती धातुओं पर दी गई शुल्क रियायतों की समीक्षा करने का आग्रह किया। उसने कहा कि भारत का सोना आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 58.9 अरब डॉलर हो गया। इसके परिणामस्वरूप, थिंक टैंक ने भारत के व्यापार संतुलन की रक्षा के लिए सख्त मूल नियमों और भविष्य के व्यापार समझौतों से कीमती धातुओं को बाहर करने की सिफारिश की है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि बेसलाइन परिदृश्य में, जहां कच्चा तेल औसतन 85 डॉलर प्रति बैरल है, सीएडी वित्त वर्ष 27 में जीडीपी का 1.7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘जब कीमतें अधिक हों तो ईंधन की मांग को नियंत्रित करने के उपाय निश्चित रूप से सीएडी में वृद्धि को रोकने में मदद करेंगे। अल नीनो के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में सोने की मांग इस वर्ष वैसे भी कमजोर रह सकती है।’

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First Published - May 12, 2026 | 8:07 AM IST

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