facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

छोटे राज्य बन गए GST कलेक्शन के नायक: ओडिशा और तेलंगाना ने पारंपरिक आर्थिक केंद्रों को दी चुनौती

Advertisement

ओडिशा उन कुछ राज्यों में से एक था जिसने जीएसटी को लागू करने के शुरुआती दौर में बनाए गए 14 प्रतिशत क्षतिपूर्ति उपकर वृद्धि बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया

Last Updated- December 25, 2025 | 10:56 PM IST
GST

भारत के कर रुझान में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। ओडिशा और तेलंगाना जैसे अपेक्षाकृत छोटे कर संग्रह वाले राज्य ही वास्तव में अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष कर संग्रह में सबसे तेजी से वृद्धि करने वाले योगदानकर्ता बनकर उभरे हैं। वे महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे पारंपरिक आर्थिक केंद्रों के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती दे रहे हैं।

देश के 28 राज्यों और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विश्लेषण से पता चला है कि जिन राज्यों का प्रत्यक्ष कर या वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 5,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, उनमें ओडिशा, जीएसटी संग्रह में सबसे आगे है। वर्ष 2017-2018 (वित्त वर्ष 2018) और 2024-2025 (वित्त वर्ष 2025) के बीच इसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) 22.4 प्रतिशत रही, जबकि तेलंगाना वित्त वर्ष 2018-2019 (वित्त वर्ष 2019) और 2023-2024 (वित्त वर्ष 2024) के बीच 50.7 प्रतिशत के सीएजीआर के साथ प्रत्यक्ष कर संग्रह में सबसे ऊपर है।

ओडिशा उन कुछ राज्यों में से एक था जिसने जीएसटी को लागू करने के शुरुआती दौर में बनाए गए 14 प्रतिशत क्षतिपूर्ति उपकर वृद्धि बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया। बिहार कर संग्रह में 20.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इसके ठीक पीछे रहा, जबकि महाराष्ट्र जो पूर्ण रूप से सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य है उसने 19.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

वित्त वर्ष 2025 में शीर्ष पांच जीएसटी संग्रह करने वाले राज्यों में बदलाव हुआ, जिसमें हरियाणा ने पांचवें स्थान पर काबिज होते हुए उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ दिया, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु शीर्ष पायदान पर बने रहे। ओडिशा का जीएसटी संग्रह, वित्त वर्ष 2018 में 14,849 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 60,928 करोड़ रुपये हो गया, जिससे यह दो पायदान ऊपर आ गया यानी वित्त वर्ष 2018 के बारहवें पायदान से वित्त वर्ष 2025 में दसवें स्थान पर आ गया। प्रत्यक्ष करों में वृद्धि के लिहाज से तेलंगाना 50.7 प्रतिशत सीएजीआर के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद छत्तीसगढ़ (20.8 प्रतिशत) और हरियाणा (18.9 प्रतिशत) का स्थान है।

प्रत्यक्ष करों के कुल संग्रह की बात करें तब राज्यों के क्रम में भी फेरबदल हुआ है। वित्त वर्ष 2019 में महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात सबसे आगे थे, वहीं वित्त वर्ष 2024 तक कर्नाटक, दिल्ली को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर पहुंच गया और दिल्ली तीसरे स्थान पर रही। तेलंगाना का प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 2019 में 10,860 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 84,439 करोड़ रुपये हो गया, जिससे यह पंद्रहवें स्थान से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर छठे स्थान पर पहुंच गया जबकि आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्य इसी अवधि के दौरान छठे पायदान से से ग्यारहवें पायदान पर खिसक गए।

एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के अनुसार, इन छोटे राज्यों का असाधारण प्रदर्शन, संरचनात्मक कारकों और नीतिगत सुधारों के तालमेल का नतीजा है। अरोड़ा ने कहा, ‘तेलंगाना को विशेष रूप से काफी प्रोत्साहन मिला है और हैदराबाद, बेंगलूरु के बाद सबसे बड़े वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) में से एक के रूप में उभरा है और यह एक प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र भी है। इन दोनों के कारण उच्च स्तर का प्रत्यक्ष कर संग्रह हुआ है।’

अरोड़ा का कहना है कि हैदराबाद अपने अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी), प्रौद्योगिकी और दवा कंपनियों के साथ-साथ वाणिज्यिक रियल एस्टेट जैसे संबंधित क्षेत्रों में वृद्धि के जरिये प्रत्यक्ष कर संग्रह को बढ़ा पाया है।

अरोड़ा ने आगे कहा, ‘तेलंगाना की अर्थव्यवस्था भी तेजी से संगठित हो गई है जिसके कारण स्वचालित रूप से कर चोरी कम हो गई है जबकि वृद्धि दर को अनुकूल आधार प्रभाव से लाभ मिला है। राज्य का गठन 2014 में ही हुआ था।’ओडिशा की कहानी उसकी खनिज संपदा पर केंद्रित है। ओडिशा के खनन क्षेत्र से राजस्व में दस गुना वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 2017 में 4,900 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में लगभग 50,000 करोड़ रुपये हो गया।

खनिज ब्लॉकों के लिए राज्य सरकार की ई-नीलामी नीति के परिणामस्वरूप मानक 15 प्रतिशत रॉयल्टी से ऊपर 150 प्रतिशत तक प्रीमियम भुगतान हुआ। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, ‘खनन राजस्व में अपने गैर-कर राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत, राज्य के कुल राजस्व का 45 प्रतिशत और कुल राजस्व प्राप्तियों का 26 प्रतिशत खनन क्षेत्र से आता है।’

अरोड़ा ने भी इस बात पर सहमति जताते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के संगठित होने और मजबूत खनन कार्यों ने जीएसटी संग्रह वृद्धि में योगदान दिया है। वह यह भी बताती हैं कि भारी बुनियादी ढांचे के निवेश (ओडिशा का पूंजीगत व्यय/सकल घरेलू उत्पाद वित्त वर्ष 2021 से सभी प्रमुख राज्यों के लिए सबसे अधिक है) और खपत में तेज वृद्धि अन्य कारक हैं।

विश्लेषण से पता चलता है कि कर संग्रह में तेज वृद्धि ने, ओडिशा को अपनी राजकोषीय स्थिति में काफी सुधार करने में सक्षम बनाया है। राज्य ने वर्ष 2024-25 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 3 प्रतिशत राजस्व अधिशेष बनाए रखा।

Advertisement
First Published - December 25, 2025 | 10:54 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement