देश के 22 राज्यों ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों (अप्रैल-फरवरी) में बजट में आवंटित अपने सालाना पूंजीगत व्यय का संयुक्त रूप से 55.27 प्रतिशत उपयोग किया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के जारी मासिक खातों के विश्लेषण के अनुसार इन 22 राज्यों ने 5.65 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया जबकि इस मद में राशि 10.22 लाख करोड़ रुपये थी।
अभी 22 राज्यों के पूंजीगत व्यय के आंकड़े उपलब्ध हैं। इनमें 9 राज्यों ने अप्रैल-फरवरी की अवधि के दौरान बजट अनुमानों के पूंजीगत व्यय का आधे से भी कम खर्च किया। इनमें राजस्थान (44.32 प्रतिशत), महाराष्ट्र (48.16 प्रतिशत), उत्तराखंड (49.71 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (42.45 प्रतिशत) हैं।
पूंजीगत व्यय करने में हरियाणा अव्वल है। हरियाणा ने 94.15 प्रतिशत पूंजीगत वय्य किया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश 90.99 प्रतिशत, बिहार 84.78 प्रतिशत और मध्य प्रदेश 74.35 प्रतिशत पर रहे। दूसरी ओर, पांच राज्यों ने विशेष रूप से धीमी प्रगति दर्ज की और उन्होंने वार्षिक आवंटन का 40 प्रतिशत से कम खर्च किया।
पश्चिम बंगाल ने इस अवधि के दौरान बजट में आवंटित पूंजीगत व्यय का 33.61 प्रतिशत खर्च किया जबकि मेघालय ने 34.15 प्रतिशत का उपयोग किया। इस अवधि के दौरान राज्यों और केंद्र के पूंजीगत व्यय करने में विरोधाभास रहा। इस दौरान राज्यों ने धीमी गति से पूंजीगत व्यय किया। लेखा महानियंत्रक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 26 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी तक केंद्रीय सरकार का पूंजीगत व्यय उसके संशोधित अनुमानों के 84.8 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इन आंकड़ों की तुलना करने पर पता चलता है कि इन 25 राज्यों ने बीते वित्त वर्ष में पूंजीगत व्यय का कहीं अधिक व्यय किया। वित्त वर्ष 25 में इन राज्यों ने सामूहिक रूप से अपने बजट वाले पूंजीगत व्यय का 80.2 प्रतिशत उपयोग किया। इस क्रम में इन राज्यों ने 9.7 लाख करोड़ रुपये के कुल आवंटन में से 7.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।
दूसरी ओर राजस्व व्यय अधिक स्थिर रूप से आगे बढ़ा। अप्रैल-फरवरी के दौरान 22 राज्यों ने 49.3 लाख करोड़ रुपये के अपने बजट वाले राजस्व व्यय का 75.5 प्रतिशत खर्च किया। हिमाचल प्रदेश ने 91.8 प्रतिशत के साथ उच्चतम उपयोग दर्ज किया। इसके बाद बिहार 89.6 प्रतिशत, पंजाब 84.7 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश 83.75 प्रतिशत पर रहा। झारखंड (64.71 प्रतिशत), महाराष्ट्र (63.6 प्रतिशत) और अरुणाचल प्रदेश (60.44 प्रतिशत) सबसे कम खर्च करने वालों में से थे।
राज्यों ने प्राप्तियों के मामले में इस अवधि के दौरान 36.5 लाख करोड़ रुपये के अपने बजट के कर राजस्व का 81.25 प्रतिशत एकत्र किया। हरियाणा 89.53 प्रतिशत के अपने वार्षिक लक्ष्य के बराबर संग्रह के साथ अग्रणी रहा। इसके बाद असम 88.46 प्रतिशत और अरुणाचल प्रदेश 88.42 प्रतिशत पर रहा। इस क्रम में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और आंध्र प्रदेश राजस्व कर पर सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में से थे।
उधार और अन्य देनदारियों ने आसानी से आधे से अधिक का आंकड़ा पार कर लिया। इसमें राज्यों ने अपने बजट वाले उधार का 69.7 प्रतिशत उपयोग किया, वित्त वर्ष 26 के पूर्ण वर्ष लक्ष्य के लिए 11.8 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 8.25 लाख करोड़ रुपये जुटाए। राज्यों के कुल सरकारी खर्च में पूंजीगत व्यय प्रमुख भूमिका निभाता है। क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 27 के लिए पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को उच्च केंद्रीय अनुदान मिलेगा और इससे सरकारी पूंजीगत व्यय थोड़ा बढ़ेगा।