वित्त वर्ष 2026 में 20 राज्यों ने अपने कुल वार्षिक पूंजीगत व्यय आवंटन 10.26 लाख करोड़ रुपये में से 77.23 फीसदी का उपयोग किया, जो 7.92 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। इसकी जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा जारी मासिक खातों के विश्लेषण से मिली है।
यह वित्त वर्ष 2025 की तुलना में पूंजीगत खर्च में थोड़ी कमी दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025 में 26 राज्यों ने अपने 9.71 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का 80.23 फीसदी खर्च किया था, जो 7.79 लाख करोड़ रुपये था। इससे पता चलता है कि वित्त वर्ष 2026 में राज्य-स्तरीय पूंजीगत व्यय की गति धीमी हुई है।
जिन 20 राज्यों के लिए पूरे वित्त वर्ष का आंकड़ा उपलब्ध है, उनमें से केवल पश्चिम बंगाल ने अपने कुल पूंजीगत खर्च के बजट में आधे से भी कम 48.06 फीसदी का उपयोग किया जबकि वित्त वर्ष 2025 में कुल आवंटन का 60.40 फीसदी खर्च हुआ था। यह संभवतः हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों के कारण हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 में राजस्थान ने कुल पूंजीगत व्यय आवंटन में से 51.82 फीसदी, छत्तीसगढ़ ने 57.12 फीसदी और त्रिपुरा ने 63.34 फीसदी खर्च किया।
तेलंगाना 147.58 फीसदी के उपयोग के साथ सूची में सबसे ऊपर रहा। इसके बाद कर्नाटक ने तय पूंजीगत व्यय का 102.46 फीसदी, हिमाचल प्रदेश ने 96.73 फीसदी, हरियाणा ने 96.56 फीसदी और बिहार 87.14 ने फीसदी खर्च किया। मध्य प्रदेश ने पूंजीगत खर्च के बजट में से 86.53 फीसदी, पंजाब ने 85.54 फीसदी और गुजरात ने 82.28 फीसदी उपयोग किया।
आंकड़ों से पता चलता है कि 8 राज्यों ने अपने वार्षिक आवंटन का 70 फीसदी से कम खर्च किया। पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा के अलावा ओडिशा 65.88 फीसदी, आंध्र प्रदेश 66.11 फीसदी, केरल 67.04 फीसदी और उत्तर प्रदेश 67.12 फीसदी के साथ कम खर्च करने वाले राज्यों में शामिल रहे।
पूंजीगत खर्च के मामले में राज्य-वार सूची में वित्त वर्ष 2025 की तुलना में काफी उलटफेर भी दिखता है। तेलंगाना के पूंजीगत खर्च में सबसे बड़ा सुधार दिखा और उसका पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2025 में 108.13 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 147.58 फीसदी हो गया। यह लगभग 39 फीसदी की उछाल है।
हरियाणा ने भी लंबी छलांग के साथ अपने उपयोग को 57.86 फीसदी से 96.56 फीसदी तक कर लिया। हिमाचल प्रदेश का पूंजीगत खर्च पहले के कुल आवंटन के 71.58 से बढ़कर 96.73 फीसदी और आंध्र प्रदेश का 42.26 से बढ़कर 66.11 फीसदी रहा।
दूसरी ओर बिहार पूंजीगत खर्च के मामले में पिछड़ गया। वित्त वर्ष 2025 में इसने कुल बजट अनुमान का 125.43 फीसदी खर्च किया था जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 87.14 फीसदी रह गया। इसी तरह मध्य प्रदेश में पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2025 के 116.25 फीसदी से कम होकर 86.53 फीसदी और कर्नाटक का 114.43 फीसदी से घटकर 102.46 फीसदी रहा गया।
पूरे वित्त वर्ष के आंकड़े राज्य के खर्च में वर्ष के अंत में होने वाली सामान्य वृद्धि को भी दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2026 के पहले 11 महीनों के बाद 22 राज्यों ने अपने पूंजीगत खर्च के आवंटन का 55 फीसदी से थोड़ा अधिक उपयोग किया था, जिससे पता चलता है कि वार्षिक राज्य पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा वित्त वर्ष के अंतिम महीनों में खर्च में किया गया था।
राजस्व व्यय अधिक स्थिर गति से आगे बढ़ा। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 20 राज्यों ने अपने कुल 50.16 लाख करोड़ रुपये के राजस्व व्यय अनुमान का 87.77 फीसदी खर्च किया, जो वित्त वर्ष 2025 में 26 राज्यों द्वारा खर्च किए गए 90.72 फीसदी से कम है।