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विकास की दौड़ में यूपी-महाराष्ट्र और गुजरात सबसे आगे, देश के कुल पूंजीगत व्यय में 30% की हिस्सेदारी

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यूपी, महाराष्ट्र और गुजरात देश के 30% पूंजीगत व्यय के साथ विकास के इंजन बने हुए हैं, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना निवेश से संपत्ति बनाने में सबसे कुशल हैं

Last Updated- March 22, 2026 | 9:19 PM IST
Capex
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के राज्यों में पूंजीगत व्यय की कहानी बदल रही है। रुबिक्स डेटा साइंसेज की ‘राज्यों की स्थिति’ पर रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने देश में कुल पूंजीगत व्यय का 30 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया है। वहीं कर्नाटक और तेलंगाना ऐसे राज्यों में हैं, जो अपने पूंजीगत व्यय से अधिक आर्थिक संपत्तियां बना रहे हैं। 

कुशलता में अग्रणी राज्यों के आंकड़ों से पता चलता है कि भले ही सिर्फ 3 राज्यों में पूंजीगत व्यय हो रहा है, लेकिन कुछ राज्यों ने निवेश से बेहतर परिणाम हासिल करने की कला विकसित कर ली है।  

रुबिक्स रिपोर्ट में देश के जीडीपी में प्रमुख भूमिका निभाने वाले 10 शीर्ष राज्यों के उत्पादक पूंजी और निवेशित पूंजी के अनुपात के बारे में बताया गया है। इस अनुपात से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2024 के दौरान इस अनुपात में व्यापक रूप से सुधार आया है। उत्पादक पूंजी वह पूंजी होती है, जिससे आर्थिक गतिविधि और आमदनी होती है, जबकि निवेशित पूंजी में कुल बुनियादी ढांचे और पहले के व्यय से बनी संपत्ति का पता चलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक और तेलंगाना वित्त वर्ष 2024 में 103 प्रतिशत और 108 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर रहे। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह संभवतः मजबूत निजी क्षेत्र के निवेश, सेवा-आधारित पूंजी की अधिकता, पूंजी के बेहतर उपयोग या निवेश रिपोर्टिंग में समय के प्रभावों को दर्शाता है।’ गुजरात 83 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो गया, जिसकी वजह गुजरात औद्योगिक नीति जैसी व्यापक नीतियां हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने अपने अनुपातों में सबसे महत्त्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की, जो मजबूत संपत्ति निर्माण और बेहतर पूंजी नियोजन परिणामों को दर्शाता है। 

महाराष्ट्र का अनुपात उच्च स्तर पर स्थिर बना रहा, जो एक विविध और परिपक्व औद्योगिक संरचना के भीतर निवेशित और उत्पादक पूंजी के बीच निरंतर तालमेल के संकेत देता है। इसके विपरीत राजस्थान और मध्य प्रदेश ने समय के साथ बहुत कम बदलाव किया है,  जिसका अर्थ है कि दक्षता में बड़ी छलांग या तीव्र परिवर्तन के बिना उनकी उत्पादक पूंजी तेजी से बढ़ी  है। दक्षता की यह प्रवृत्ति तब सामने आई, जब पूंजीगत व्यय भारी रूप से केंद्रित रहा।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने वित्त वर्ष 2025 में भारत के पूंजीगत व्यय का लगभग 30 प्रतिशत खर्च किया।  उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बुन्देलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे, जेवर (नोएडा) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण गलियारों, और यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीए) द्वारा बड़े औद्योगिक भूमि विकास सहित बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की वजह से  पूंजीगत व्यय हुआ। 

शीर्ष 10 राज्यों ने लगभग 67 प्रतिशत पूंजीगत व्यय किया है। इससे व्यापक दक्षता लाभों के बजाय कुछ राज्यों में पूंजी के संकेंद्रण का पता चलता है।  पूंजी के सृजन की स्थिति देखें तो सकल नियत पूंजी सृजन (जीएफसीएफ) के नए आंकड़ों से पता चलता है कि धीरे धीरे भौगोलिक संतुलन हो रहा है। पश्चिमी क्षेत्र की हिस्सेदारी वित्त वर्ष2015 के 49 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 34 प्रतिशत रह गईहै, जबकि उत्तरी व दक्षिणी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ी है।

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First Published - March 22, 2026 | 9:19 PM IST

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