facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

थोक महंगाई 42 महीने के हाई पर पहुंची! पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने मचाया हड़कंप, आम जनता पर बढ़ेगा दबाव!

Advertisement

अप्रैल में थोक महंगाई 8.3% पहुंचकर 42 महीने के उच्चतम स्तर पर रही, जिसका मुख्य कारण ईंधन और वैश्विक कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।

Last Updated- May 15, 2026 | 9:14 AM IST
WPI, Inflation
Representative image

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई अप्रैल में बढ़कर 8.3 फीसदी हो गई जो मार्च में 3.88 फीसदी थी। यह पिछले 42 महीनों का उच्चतम स्तर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। ईंधन एवं बिजली की कीमतों में
पश्चिम एशिया संकट के कारण भारी वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने इसे युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का पहला संकेत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ये आंकड़े खुदरा स्तर पर कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार पर पड़ने वाले दबाव को भी दर्शाते हैं।

अप्रैल का यह आंकड़ा अक्टूबर 2022 में 8.67 फीसदी पर पहुंचे थोक महंगाई के बाद सबसे अधिक है।

पश्चिम एशिया संकट के दूसरे पूरे महीने में ईंधन श्रेणी की महंगाई 24.71 फीसदी रही जबकि पिछले महीने यह 1.05 फीसदी थी। अप्रैल का आंकड़ा अक्टूबर 2022 के बाद 42 महीनों में सबसे अधिक है जब यह 25.4 फीसदी था। इस श्रेणी की सभी वस्तुओं में दो अंकों की महंगाई दर्ज की गई। एलपीजी में 10.92 फीसदी, पेट्रोल में 32.40 फीसदी और डीजल में 25.19 फीसदी की महंगाई दिखी।

सूचकांक में 64 फीसदी से अधिक भारांश वाले विनिर्मित उत्पादों में महंगाई अप्रैल में 4.62 फीसदी तक बढ़ गई जो मार्च में 3.39 फीसदी थी। पिछली बार सितंबर 2022 में महंगाई 6.12 फीसदी पर अप्रैल के स्तर के पार पहुंची थी।

इसके अलावा, खाद्य उत्पादों (2.9 फीसदी), वनस्पति एवं पशु तेल व वसा (4.43 फीसदी), कपड़ा (7.3 फीसदी), रसायन एवं रासायनिक उत्पाद (5.09 फीसदी) और बुनियादी धातुओं (7 फीसदी) के मूल्यों में पिछले महीने के मुकाबले अप्रैल में भारी वृद्धि देखी गई।

इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि धातुओं की ऊंची वैश्विक कीमतों, अल नीनो के प्रभाव की आशंका और आयात की भारी लागत के कारण आगामी महीनों के दौरान विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई में तेजी बनी रह सकती है।

आंकड़ों से पता चला कि प्राथमिक खाद्य पदार्थों में 1.98 फीसदी की मामूली महंगाई दर्ज की गई जो मार्च में 1.9 फीसदी थी। मगर गैर-खाद्य श्रेणी में महंगाई 11.5 फीसदी से बढ़कर 12.18 फीसदी हो गई। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने माना कि इस साल अल नीनो के प्रभाव की आशंका खाद्य महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस श्रेणी में इस महीने महंगाई 67.18 फीसदी तक पहुंच गई। कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में 88.06 फीसदी की वृद्धि हुई। सिन्हा ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि आरबीआई नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रखेगा।’

Advertisement
First Published - May 15, 2026 | 9:14 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement