facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

2024 का लोकसभा चुनाव अब तक का सबसे महंगा, 1.35 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच सकता है खर्च : रिपोर्ट

Advertisement

यह 2019 के चुनावों में खर्च किए गए 60,000 करोड़ रुपये से काफी ज़्यादा है।

Last Updated- April 25, 2024 | 5:31 PM IST
Lok Sabha Elections 2024 is the second longest electoral program after independence, gender ratio also improved लोकसभा चुनाव 2024 आजादी के बाद दूसरा सबसे लंबा चुनावी कार्यक्रम, लिंगानुपात भी हुआ बेहतर

भारत में 2024 के लोकसभा चुनाव इतिहास के सबसे महंगे चुनाव होने की उम्मीद है, जिसकी अनुमानित लागत 1.35 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। यह 2019 के चुनावों में खर्च किए गए 60,000 करोड़ रुपये से काफी ज़्यादा है। जाने-माने चुनाव विशेषज्ञ एन भास्कर राव ने ये आंकड़े साझा करते हुए अभियान के खर्च में बड़ी बढ़ोतरी को बताया।

सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) के प्रमुख राव ने 30 साल से भी ज़्यादा समय से चुनाव खर्च पर बारीकी से नज़र रखी है। उन्होंने बताया कि इस खर्च में चुनाव से जुड़ी सभी लागतें शामिल हैं, जैसे राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, सरकार और चुनाव आयोग द्वारा किए जाने वाले खर्च।

नियमों के बावजूद, चुनावी बॉन्ड से इतर तरीकों से भी चुनाव में पैसा घुस जाता है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने पाया कि प्रमुख राजनीतिक दलों को मिलने वाले कई दान अज्ञात स्रोतों से आते हैं, जिससे फंडिंग में पारदर्शिता की कमी का पता चलता है।

चुनावों से पहले रैलियों, ट्रांसपोर्ट और कर्मचारियों को काम पर रखने जैसी चीज़ों पर बहुत सारा पैसा खर्च किया जाता है। राव ने राजनीतिक नेताओं की खरीद-फरोख्त की विवादास्पद प्रथा का भी ज़िक्र किया, जिससे खर्च बढ़ जाता है।

चुनाव खर्च का लगभग 30% मीडिया अभियानों में जाता है। पार्टियां अब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का अधिक उपयोग कर रही हैं, अपनी दृश्यता बढ़ाने के लिए पेशेवरों को नियुक्त कर रही हैं। यह परिवर्तन टीवी और प्रिंट जैसे पारंपरिक तरीकों को कम महत्वपूर्ण बना सकता है।

चुनाव प्रचार खर्च को सीमित करने के नियमों के बावजूद, पार्टियाँ अभी भी ज़्यादा खर्च करने के तरीके ढूँढ़ लेती हैं। राव ने कहा कि अमीर उम्मीदवारों के पास चुनावों में ज़्यादा ताकत होती है, जो दिखाता है कि भारतीय राजनीति में विचारों से ज़्यादा पैसे का महत्व है। (PTI के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - April 25, 2024 | 5:31 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement