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पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी ने और भी मजबूत किया अपना किला

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पश्चिम बंगाल 42 सीटों के साथ संसद के निचले सदन में तीसरा सबसे बड़ा दल है।

Last Updated- June 04, 2024 | 11:41 PM IST
Mamta Banerjee

विरोधी दलों के भ्रष्टाचार के प्रचार को धता बताते हुए लोक सभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पर फिर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। बेहद कड़े मुकाबले में तृणमूल ने राज्य की 29 सीटों पर लंबी बढ़त बना ली और भाजपा को केवल 12 सीटों तक ही समेट दिया।

खबर लिखे जाने तक निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिए आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस केवल एक सीट पर आगे थी। पश्चिम बंगाल 42 सीटों के साथ संसद के निचले सदन में तीसरा सबसे बड़ा दल है।

अधिकांश एक्जिट पोल में बंगाल में भाजपा को तृणमूल पर बढ़त दिखाई गई थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों को बधाई देते हुए कहा, ‘मैं हमेशा बंगाल के लोगों की आभारी रहूंगी। मैं खुश हूं कि मोदी जी को अकेले दम बहुमत नहीं मिला है। वह विश्वसनीयता खो चुके हैं। ‘इस बार, 400 पार’ का नारा देने वाले मोदी जी को अब अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।’

ममता ने यह भी कहा कि वह यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगी कि मोदी सत्ता से बाहर हों और केंद्र में ‘इंडिया’ गठबंधन सरकार बनाए।

राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता और नंदीग्राम से विधायक ने कहा कि बंगाल में भाजपा ने उम्मीद से बहुत कम प्रदर्शन किया है, लेकिन राज्य के 39 प्रतिशत लोगों ने उनकी पार्टी में भरोसा जताया है। वोट शेयर के मामले में तृणमूल कांग्रेस को 45.79 और भाजपा को 38.67 प्रतिश वोट मिले हैं। पिछले चुनाव में तृणमूल को 22 सीट मिली थी, जबकि 2014 के चुनाव में पार्टी ने राज्य की 34 सीटें जीती थीं।

तृणमूल के लिए सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर थी कि भाजपा धीरे-धीरे उसके गढ़ पर कब्जा करती जा रही थी, क्योंकि पिछले चुनाव में विपक्षी दल को 18 सीट और लगभग 40.6 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन इसके बाद हुए 2021 के विधान सभा चुनाव में बनर्जी ने शानदार जीत दर्ज की और अब लोक सभा चुनाव में सीट बढ़ाकर उन्हें इस बात का संतोष हो सकता है कि वह राज्य में अपनी और पार्टी की हैसियत बरकरार रखने में कामयाब रहीं।

बनर्जी ने कहा कि उन्होंने लोक सभा चुनाव में विधान सभा चुनाव से भी बेहतर प्रदर्शन किया है। विपक्षी दलों ने राज्य की तृणमूल सरकार को भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर घेरने की कोशिश की थी, लेकिन मतदाताओं पर इस मुहिम का खास असर नहीं हुआ।

राजनीतिक विश्लेषक सब्यसाची बसु राय चौधरी कहते हैं कि कई ऐसे कारक रहे जो तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में गए। उन्होंने कहा, ‘लक्ष्मी भंडार जैसी कई कल्याणकारी योजनाओं के चलते महिलाओं ने तृणमूल को पसंद किया। सीसीए के चलते भी एकमुश्त वोट बनर्जी की पार्टी को गया। दूसरी बात, भजापा का बूथ स्तर संगठन भी राज्य में काफी कमजोर साबित हुआ।’

रात को सवा आठ बजे तक तृणमूल कांग्रेस 12 सीट पर जीत दर्ज कर चुकी थी और 17 पर वह बढ़त बनाए हुए थी। ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी रिकॉर्ड 7,10,930 मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। महुआ मोइत्रा और यूसुफ पठान भी लंबी बढ़त बनाए हुए थे।

सीपीआई(एम) और कांग्रेस का वोट शेयर राज्य में लगातार घटता जा रहा है। सीपीआईएम को केवल 5.62 प्रतिशत वोट मिले, जिसे 2019 के लोक सभा चुनाव में 6.3 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया था। इसी प्रकार कांग्रेस के खाते में इस बार 4.71 प्रतिशत वोट गए जबकि पिछले आम चुनाव में उसे भी 5.7 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ था।

 

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First Published - June 4, 2024 | 11:36 PM IST

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