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इंडियन बैंक का बड़ा प्लान! रिटेल, कृषि और MSME से ग्रोथ तेज करने की तैयारी; FY27 में डिपॉजिट पर दबाव बरकरार

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इंडियन बैंक ने FY27 के लिए रिटेल, कृषि और MSME सेक्टर में ग्रोथ जारी रखते हुए मुनाफा बढ़ाने की रणनीति बनाई है।

Last Updated- May 04, 2026 | 9:10 AM IST
Indian Bank
Representative image

इंडियन बैंक के लिए वित्त वर्ष 2027 में जमा जुटाने पर दबाव जारी रहेगा। इंडियन बैंक के एमडी व सीईओ बिनोद कुमार ने अंजलि कुमारी और मनोजित साहा को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कार में बताया कि खुदरा, कृषि व एमएसएमई में वृद्धि जारी रहेगी। अभी तक मार्जिन निचले स्तर पर नहीं पहुंचा है। पेश हैं मुख्य अंश :

बैंक के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

पुराने निजी बैंकों में शुमार फेडरल बैंक ज्यादातर बैंकों से बहुत आगे है। इतने सारे बैंकों के बीच हमारा कारोबार बेहतरीन रहा है मगर हम निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों के समूह में नहीं पहुंच पाए हैं। हम निजी क्षेत्र का पांचवां सबसे बड़ा बैंक बनना चाहते हैं। केरल में हमारी बाजार हिस्सेदारी 18-20 फीसदी है। क्षेत्रीय स्तर पर हम काफी मजबूत हैं मगर अब हम देश भर में पहचान बनाना चाहते हैं। हमने आधा सफर तय कर लिया है और बाकी सफर भी जल्द पूरा करना चाहते हैं।

पांच साल में कुल कारोबार कहां तक पहुंचेगा?

बाजार में जो भी माहौल रहता है, उसके हिसाब से हमारा कारोबार 16 से 18 फीसदी की दर से बढ़ना चाहिए।

किन क्षेत्रों में सुधार की दरकार महसूस हो रही है?

तीन क्षेत्रों में। सबसे पहले हमें देनदारी ठीक करनी होगी और चालू खाते के मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। हमारी कुल जमा में चालू खातों की हिस्सेदारी 6 फीसदी ही है, जबकि ज्यादातर बैंकों में यह 12 से 15 फीसदी है। इसलिए हम इसे बढ़ाकर 10 फीसदी और उसके भी पार ले जाना चाहते हैं।

दूसरा क्षेत्र परिसंपत्ति का है, जहां ऋण की गुणवत्ता अच्छी है और उसकी लागत भी वाजिब है। अभी हमारा बैंक कम जोखिम ले रहा है और कम रिटर्न पा रहा है। अब हम ज्यादा जोखिम लेकर रिटर्न को मध्यम स्तर तक ले जाना चाहते हैं। तीसरा लक्ष्य शुल्क से होने वाली आय बढ़ाना है, जहां हम बड़े बैंकों से पीछे हैं। शुल्क आय में ज्यादातर विदेशी मुद्रा, संपत्ति प्रबंधन, कार्ड शुल्क आदि से आती है। इसमें कारोबार बढ़ाने की बहुत गुंजाइश है। इस आय में हम 25-30 फीसदी रफ्तार से इजाफा करना चाहते हैं।

कंपनियों को कर्ज देने के मामले में नीति क्या है?

हम मझोली कंपनियों के पास जाएंगे। बड़ी कंपनियों की तरफ हमारा इरादा नहीं है। हमारी पूंजी लागत देखते हुए मझोली कंपनियों को कर्ज देने में ही हम होड़ कर सकते हैं। बड़ी कंपनियों के लिए ब्याज दर ऐसी होती है कि हम मुनाफा नहीं कमा पाएंगे। लेकिन मझोली कंपनियां हमारे लिए कारगर रहेंगी और हम उन कंपनियों को चालू खाते, व्यापार, विदेशी मुद्रा आदि सेवाएं दे पाएंगे। हम मुख्य रूप से एसएमई और छोटे कारोबार पर केंद्रित हैं।

आवास ऋण में कारोबार सुस्त रहा है। इसकी क्या वजह है?

हमें कारोबार ऐसे रखना है कि मध्यम लाभ देने वाली संपत्तियां तेजी से बढ़ें और कम रिटर्न देने वाली धीमे बढ़ें। आवास ऋण में रिटर्न कम मिलता है, इसलिए हम उसे धीमी रफ्तार से ही बढ़ाएंगे। माहौल सही हो गया तो हम अधिक मुनाफा देने वाली परिसंपत्तियों पर भी दांव खेलेंगे। क्रेडिट कार्ड बढ़ेंगे और हम उन्हें बढ़ाते रहेंगे। व्यक्तिगत ऋण और सूक्ष्म वित्त ऋण में बाजार की हालत और कर्ज की गुणवत्ता देखकर ही फैसला किया जाएगा। मुझे लगता है कि अगली दो तिमाहियों तक सूक्ष्म वित्त कारोबार की स्थिति ठीक नहीं रहेगी।

क्या सूक्ष्म वित्त उद्योग में आप बड़े कारोबार के लिए तैयार हैं?

आम तौर पर हम ऐसे सौदों के लिए तैयार रहते हैं। मगर हमारे बहीखाते में सूक्ष्म वित्त की हिस्सेदारी 5 फीसदी से अधिक कभी नहीं होगी। मध्यम अवधि में हम बिना रेहन के कर्ज की हिस्सेदारी कुल कर्ज में 10-15 फीसदी से अधिक नहीं होने देंगे।

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First Published - May 4, 2026 | 9:10 AM IST

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