भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा में उधार (ओएफसीबी) लेने के लिए मुद्राओं की अदला-बदली यानी स्वैप की रियायती सुविधा मुहैया कराई है। कर्ज की तेजी से बढ़ती मांग के बीच जमा जुटाने के लिए तगड़ी मशक्कत कर रहे बैंकों को लिए इस सुविधा से रकम हासिल करना आसान हो सकता है।
पिछले सप्ताह जारी एक सर्कुलर में केंद्रीय बैंक ने कहा कि ओएफसीबी स्वैप सुविधा निजी बैंकों समेत ‘ऑथराइज्ड डीलर कैटगरी-1’ के सभी बैंकों के लिए उपलब्ध है। यह सुविधा विदेशी मुद्रा में कम से कम तीन साल के लिए हासिल किए गए कर्ज पर ही उपलब्ध होगी। इस योजना में बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए केवल सार्वजनिक संस्थानों को ही अधिकृत किया गया है। विदेशी मुद्रा में उधार भी ईसीबी का ही एक खास प्रकार होता है।
मुद्रा की अदला-बदली 1.5 प्रतिशत सालाना की तय दर पर होगी और ब्याज हर छह महीने में मिलेगा। यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी। बाजार में हेजिंग की लागत लगभग 3.5 से 4 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि आरबीआई की रियायती स्वैप व्यवस्था के तहत लागत में 200-250 आधार अंक की कमी आएगी।
ब्रोकिंग फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा,‘बैंक के लिए ओएफसीबी ऋणों की हेजिंग में आम तौर पर 3.5-4.0 प्रतिशत खर्च आता है। इस हिसाब से बैंकों को नए ओएफसीबी ऋणों पर 200-250 आधार अंक का फायदा मिल जाएगा।’ जानकारों का कहना है कि ओएफसीबी के रास्ते जुटाई गई रकम उसी मियाद में पूरी होने वाली देसी जमा के मुकाबले 40-50 आधार अंक सस्ती पड़ सकती है, जिससे बैंकों को कम लागत में कर्ज की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। इससे जमा जुटाने का दबाव कम हो सकता है और मौद्रिक नीति के उपायों का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है क्योंकि कर्ज सस्ता होगा और मनी एवं डेट बाजार में सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, कमर्शियल पेपर तथा सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड भी नीचे आएंगी।
भारतीय स्टेट बैंक ने रिपोर्ट में कहा,‘मोटा अनुमान है कि 2026-27 में बैंक ओएफसीबी के जरिये 5 से 8 अरब डॉलर उधार ले सकते हैं। कर्ज की मांग पूरी करने के लिए देसी जमा तेजी से नहीं आ रहा है, इसलिए ओएफसीबी सुविधा से बैंकों को उसी मियाद की देसी जमा के मुकाबले 40-50 आधार अंक कम ब्याज पर रकम मिल सकती है।’ बैंक अपनी समूची टियर-1 पूंजी इसी सुविधा के जरिये जुटा सकते हैं।
इस सुविधा का मकसद डॉलर की आमद बढ़ाना और महंगे कच्चे तेल तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच बाहरी क्षेत्र पर दबाव कम करना है। एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा,‘उम्मीद के मुताबिक रकम आई तो जमा और कर्ज की वृद्धि के बीच अंतर काफी घट सकता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली पर रकम का इंतजाम करने का दबाव भी कम होगा।’ हालिया आंकड़े बताते हैं कि ऋण और जमा में वृद्धि के बीच 550 आधार अंक का अंतर आ गया है। 31 मई 2026 तक कर्ज साल भर पहले के मुकाबले 17.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहे थे और जमा में केवल 12.2 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी।
रिजर्व बैंक ने बैंकों को अनिवासियों द्वारा विदेशी मुद्रा में बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा, ईसीबी और विदेशी मुद्राओं में लिए गए ऋण के लिए हाल ही में घोषित विदेशी मुद्रा स्वैप से जुड़े लेनदेन को अपनी नेट ओवरनाइट ओपन पोजिशन की गणना से बाहर रख रखें।