पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच भारत में टर्म जीवन बीमा पॉलिसियों की मांग बढ़ रही है। क्षेत्रीय अनिश्चितता की चिंता और भारतीय बीमा उत्पादों के किफायती होने से इसकी मांग बढ़ी है।
बजाज लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य ऑपरेशंस और कस्टमर एक्सपीरियंस अधिकारी राजेश कृष्णन ने कहा, ‘हम खाड़ी देशों से संपर्क करने वाले प्रवासी भारतीय ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी देख रहे हैं। ये लोग भारत में बीमा योजना लेने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘यह पूरे उद्योग की प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिसमें भारत में कम प्रीमियम और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में छूट प्रवासी भारतीयों के बीच टर्म बीमा उत्पादों को लेकर रुचि बढ़ाने में मदद कर रही है। ऐसी पॉलिसियों की प्रवासियों की ओर से कुल मांग में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) क्षेत्र की हिस्सेदारी आधे से अधिक हो गई है।’
उद्योग के विशेषज्ञों ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण इस साल मार्च से अप्रैल के दौरान टर्म पॉलिसियों के नए व्यवसाय प्रीमियम में 35 फीसदी की मासिक वृद्धि हुई। कुछ ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत में टर्म बीमा की मांग में बढ़ी थी लेकिन अप्रैल के बाद मांग सामान्य हो गई है। मई में कुल प्रीमियम वृद्धि धीमी रही और मासिक आधार पर 4.8 फीसदी बढ़ी। समूह बीमा प्रीमियम में कमजोर वृद्धि से कुल प्रीमियम वृद्धि पर असर पड़ा है।
पॉलिसीबाजार में टर्म बीमा के प्रमुख वरुण अग्रवाल ने कहा कि उनकी टर्म बीमा पॉलिसियों की लगभग आधी मांग पश्चिम एशिया क्षेत्र से आती है।
अग्रवाल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कुल मांग में पश्चिम एशिया क्षेत्र का योगदान 50 फीसदी से अधिक है। हाल के भू-राजनीतिक तनाव की वजह से प्रवासी भारतीय देश में रहने वाले अपने परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।’
क्षेत्रीय स्थिरता संबंधी चिंताओं के अलावा प्रवासी भारतीयों द्वारा भारत में बीमा खरीदने के अन्य कारण भी हैं, जिनमें उनके संबंधित देशों में खरीद पर प्रतिबंध या भारत की तुलना में ज्यादा प्रीमियम शामिल हैं। इसके अलावा कई प्रवासी भारत की पॉलिसियों को पसंद करते हैं क्योंकि उनके लाभार्थी, जैसे कि माता-पिता या पति/पत्नी, भारत में रहते हैं, जिससे दावों का निपटान और लाभ प्राप्त करना अधिक सुविधाजनक हो जाता है।
इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी ऋषभ गांधी ने कहा, ‘जो प्रवासी भारतीय सुरक्षा प्लान खरीद रहे हैं वे अब ज्यादा बीमा राशि चुन रहे हैं। वे भारत में अपनी आय की भरपाई, होम लोन की देनदारियों और आश्रितों की जिम्मेदारियों के हिसाब से कवरेज तय कर रहे हैं। ये ग्राहक सोच-समझकर और पूरा शोध करके बीमा पॉलिसी खरीदने का फैसला करते हैं तथा लागत के बजाय कवरेज पर उनका ज्यादा ध्यान होता है।’
हालांकि ज्यादा बीमा राशि वाली पॉलिसियों की मांग बढ़ रही है लेकिन प्रीमियम में खास बदलाव नहीं आया है क्योंकि जीवन बीमा कंपनियां सिर्फ ग्राहक की भौगोलिक स्थिति के आधार पर पॉलिसी की कीमत तय नहीं करती हैं। बीमा कंपनियां प्रस्ताव का आकलन करते समय पेशा या खास जोखिम के कारकों पर विचार कर सकती हैं लेकिन महज खाड़ी देश में रहने भर से प्रीमियम नहीं बढ़ता है।
सितंबर 2025 में व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी दर को 18 फीसदी से घटाकर शून्य करने के बाद भारत में टर्म बीमा उत्पादों की बिक्री में बढ़ी है। बीमा कंपनियों का कहना है कि इस कदम से बीमा खरीदना सस्ता हुआ और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सुरक्षा पॉलिसियों, खासकर ज्यादा बीमा राशि वाले कवर की मांग बढ़ी।