भारतीय रिजर्व बैंक ने पूंजी बाजार एक्सपोजर नियमों पर अमल तीन महीने आगे बढ़ाकर 1 जुलाई कर दिया है। इससे देसी शेयर ब्रोकरों को कुछ समय के लिए राहत मिली है। साथ ही वे इस समय का उपयोग नियामक के समक्ष और अधिक मांग उठाने और अतिरिक्त रियायतें पाने के लिए भी कर सकते हैं।
आरबीआई के पूंजी बाजार एक्सपोजर नियमों में बैंकों के लिए भारतीय कंपनियों द्वारा अधिग्रहण के लिए रकम मुहैया कराने के मामले में सक्षम ढांचा प्रदान करने के दिशानिर्देश शामिल थे। साथ ही इनमें शेयरों, रीट्स, इनविट्स आदि के यूनिटों के बदले व्यक्तियों को बैंकों द्वारा ऋण देने की सीमाओं को तर्कसंगत बनाना और पूंजी बाजार इंटरमीडियरीज को ऋण देने के लिए सिद्धांत आधारित ढांचा शामिल था। ये नियम 1 अप्रैल से लागू होने थे।
सोमवार देर रात आरबीआई ने कहा कि बैंकों, पूंजी बाजार इंटरमीडियरीज और उद्योग निकायों के अनुरोधों में परिचालन और व्याख्या से जुड़े मसलों को उठाया गया था। लिहाजा, उसने संशोधित निर्देशों पर अमल को तीन महीने के लिए टाल दिया है और अब ये 1 जुलाई से लागू होंगे।
निजी बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा, तीन महीने के इस विस्तार का मकसद बैंकों के बजाय कैपिटल मार्केट के बिचौलियों को अंतरिम राहत देना है क्योंकि उन्होंने नियामक के सामने यह बात रखी थी कि इससे उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ सकता है। वे शायद इस समय का इस्तेमाल आगे की बातचीत के लिए करेंगे। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण फाइनेंसिंग से जुड़े जो भी स्पष्टीकरण दिए गए हैं, वे सांकेतिक हैं और लागू करने की समय-सीमा का उन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा, कुल मिलाकर यह कदम मुख्य रूप से उन शेयर ब्रोकरों की मांग के जवाब में उठाया गया है, जो समय-सीमा में विस्तार और रियायत चाहते थे क्योंकि इन नियमों से सबसे ज्यादा वे ही प्रभावित होते।
फरवरी में आरबीआई ने ऐसे नियम जारी किए थे। इनके तहत ब्रोकरों की प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फाइनैंस पर रोक लगा दी गई थी। प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग में स्टॉक ब्रोकर जैसे वित्तीय संस्थान अपने खुद के धन से ट्रेडिंग करते हैं और मुनाफा कमाते हैं। आरबीआई ने कहा था कि बैंकों को किसी कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी (सीएमआई) को अपने खुद के खाते में प्रतिभूतियां खरीदने के लिए रकम नहीं देना चाहिए।
नए नियमों के तहत यह भी जरूरी है कि सीएमआई को दी जाने वाली सभी क्रेडिट सुविधाएं पूरी तरह जमानत के साथ हों। इसका मतलब है कि बैंकों के पास लोन के बदले 100 फीसदी जमानत होना चाहिए। इसके अलावा, इक्विटी जमानत पर हेयरकट को पहले के 25 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम 40 फीसदी कर दिया गया था।
प्रॉपराइटरी ट्रेड के लिए बैंक फंडिंग पर रोक को इस सेक्टर में बड़ा झटका माना गया क्योंकि ब्रोकर दोहरे लाभ के लिए बैंक गारंटी पर निर्भर रहते थे। बैंकों को अपनी-बुक ट्रेडिंग के लिए क्रेडिट देने से रोकने और ज्यादा सख़्त व पूरी तरह से कोलैटरल आधारित लोन नियम अनिवार्य करने के पीछे आरबीआई का इरादा असल में प्रॉप डेस्क के लिए सस्ते लिवरेज को खत्म करना था। नतीजतन प्रॉप फर्मों को अपने अंदरूनी पूंजी पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता, जिससे फंडिंग की लागत बढ़ जाती और मुनाफा कम हो जाता, खासकर छोटी कंपनियों के लिए।
एसोसिएशन ऑफ़ एनएसई मेंबर्स ऑफ़ इंडिया (एएनएमआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. सुरेश ने कहा, इसे टालने का फैसला स्वागत योग्य कदम है। आरबीआई ने मार्केट मेकर्स के लिए भी कुछ छूटों की घोषणा की है, जो मददगार साबित होंगी। प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग को लेकर चिंता बनी हुई है। इसमें एकमात्र बदलाव यह है कि पहले सरकारी प्रतिभूतियों को जमानत में शामिल किया जाता था, लेकिन अब 100 फीसदी जमानत कैश और कैश के बराबर चीजों के रूप में देनी होगी। यह भी राहत की बात है कि ब्रोकर इन सरकारी प्रतिभूतियों का इस्तेमाल कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि वे सेबी के सामने कुछ प्रस्ताव रखेंगे क्योंकि वे दूसरे नियामक के साथ बातचीत में हमारी मदद कर रहे हैं।
5पैसा कैपिटल के प्रबंध निदेशक और सीईओ गौरव सेठ ने कहा, नए नियमों के लागू होने के लिहाज से तैयारी करना सबसे अच्छा है। इस विस्तार से ब्रोकरों को नियमों का पालन करने के लिए परिचालन संबंधी जरूरी दिक्कतों को दूर करने का समय मिल गया है। 5पैसा में हम अपनी क्रेडिट लाइन की समीक्षा कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे क्लाइंट्स के काम-काज में कोई रुकावट न आए।
इस बीच, आरबीआई ने बैंकों पर लगी वह रोक हटा दी है, जिसके तहत वे उन प्रतिभूतियों के बदले मार्केट मेकर्स को फ़ाइनैंस नहीं दे सकते थे, जिनमें वे मार्केट-मेकिंग का काम करते हैं। आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि नॉन-डेट म्युचुअल फ़ंडों को दी जाने वाली इंट्रा-डे उन सुविधाओं को कैपिटल मार्केट एक्सपोजर के तौर पर नहीं गिना जाएगा जो सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल और एसडीएल की मैच्योरिटी से मिलने वाली रकम, सरकारी प्रतिभूतियों और एसडीएल पर ब्याज या क्लियरिंग कॉरपोरेशन से ट्रेप्स मैच्योरिटी जैसी गारंटीड और उसी दिन मिलने वाली रकम से सुरक्षित होती हैं।