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रिजर्व बैंक का प्रस्ताव: 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा एसेट वाली NBFC होंगी अपर लेयर में, नियम होंगे सरल

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केंद्रीय बैंक ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी इस परिसंपत्ति सीमा को पार करती हैं तो उन्हें भी अपर लेयर में शामिल किया जाएगा

Last Updated- April 10, 2026 | 10:57 PM IST
NBFC

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उच्च स्तर या अपर लेयर में वर्गीकृत करने के मौजूदा ढांचे में व्यापक सुधार का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत वर्गीकरण के लिए आकार आधारित मानदंड अपनाने का सुझाव दिया गया है।

प्रस्ताव के अनुसार 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की परिसंपत्ति वाली एनबीएफसी अपनी नवीनतम अंके​क्षित बैलेंस शीट के आधार पर अपर लेयर इकाई के रूप में वर्गीकृत की जाएंगी। केंद्रीय बैंक ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी इस परिसंपत्ति सीमा को पार करती हैं तो उन्हें भी अपर लेयर में शामिल किया जाएगा। फिलहाल ऐसी इकाइयों को बुनियादी या मध्य स्तर में रखा जाता है। मसौदा निर्देशों पर एनबीएफसी, आम लोगों और अन्य सभी संबंधित हितधारकों से 4 मई तक प्रतिक्रिया मांगी गई है।

मौजूदा समय में 15 एनबीएफसी को उच्च श्रेणी की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है और सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी को शामिल करने से यह संख्या बढ़ सकती है। उच्च स्तर की एनबीएफसी में बजाज फाइनैंस, श्रीराम फाइनैंस, एलऐंडटी फाइनैंस, टाटा कैपिटल, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज, आदित्य बिड़ला फाइनैंस, पिरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस, मुथूट फाइनैंस, एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज, सम्मान कैपिटल, बजाज हाउसिंग फाइनैंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस और टाटा संस शामिल हैं।

जनवरी 2025 में उच्च स्तर की एनबीएफसी की सूची जारी करते हुए आरबीआई ने कहा था, ‘ उच्च स्तर की एनबीएफसी की सूची में टाटा संस को शामिल करना, उसके पंजीकरण खत्म करने के आवेदन के परिणाम पर कोई असर नहीं डालेगा, जिसकी अभी जांच चल रही है।’

वर्तमान में एनबीएफसी के लिए पैमाने पर आधारित नियामक (एसबीआर) ढांचे में उच्च स्तर की एनबीएफसी की पहचान के लिए द्विआयामी पद्धति निर्धारित है। आरबीआई के अनुसार उच्च स्तर वर्तमान में मात्रात्मक और गुणात्मक मापदंडों के स्कोरिंग ढांचे के माध्यम से तय की जाती है, जिसका क्रमशः 70 फीसदी और 30 फीसदी भार होता है।

आरबीआई ने कहा, ‘उच्च स्तर की एनबीएफसी की पहचान के लिए पारदर्शी, सरल और पूर्ण मानदंड अपनाने के उद्देश्य से मौजूदा पद्धति को परिसंपत्ति के आकार मानदंड से बदलने का प्रस्ताव है जो वर्तमान में 1 लाख करोड़ रुपये और उससे अधिक के लिए प्रस्तावित है।’

इक्रा में वरिष्ठ उपाध्यक्ष और को-ग्रुप हेड, फाइनैंशियल सेक्टर रेटिंग्स, एएम कार्तिक के अनुसार सरकारी एनबीएफसी को भी उच्च स्तर में शोमिल करने से इस श्रेणी के एनबीएफसी की संख्या बढ़ जाएगी।

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First Published - April 10, 2026 | 10:42 PM IST

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