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रुपये को बचाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं RBI, महंगाई पर फोकस बरकरार

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रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और महंगे कच्चे तेल के बावजूद RBI फिलहाल ब्याज दरें बढ़ाने से बच सकता है, जबकि महंगाई और आर्थिक वृद्धि के संतुलन पर नजर रखी जा रही है।

Last Updated- May 22, 2026 | 12:44 PM IST
RBI
Representational Image

RBI interest rates: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने यह जानकारी दी। इससे साफ संकेत मिलता है कि RBI की प्राथमिकता महंगाई को नियंत्रित करना है, न कि रुपये की कमजोरी के जवाब में ब्याज दरें बढ़ाना। सूत्रों के मुताबिक, RBI के पास रुपये को सहारा देने के लिए अभी कई अन्य विकल्प मौजूद हैं। रॉयटर्स ने पहले बताया था कि इनमें एनआरआई के लिए डॉलर जमा योजनाएं और डेट निवेशकों के लिए टैक्स में बदलाव जैसे विकल्प शामिल हैं।

एक सूत्र ने कहा कि सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और सरकार के साथ मिलकर इन पर चर्चा चल रही है। सूत्र ने कहा कि फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि केंद्रीय बैंक को तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत है।

बढ़ाई जा सकती हैं RBI interest rates

RBI का यह रुख बाजार की उम्मीदों से अलग है। बाजार को उम्मीद है कि रुपये में गिरावट को रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं। ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में आई तेजी से रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।

हालांकि महंगाई अभी भी नियंत्रण में है और अधिकारियों को लगता है कि ब्याज दरें बढ़ाने से रुपये को ज्यादा सहारा नहीं मिलेगा, जबकि इससे भारत जैसी एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ती वृद्धि को और नुकसान पहुंच सकता है।

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इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों ने महंगाई और मुद्रा कमजोरी के खतरे को देखते हुए ब्याज दरें बढ़ाई हैं। फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत कमजोर हो चुका है और गुरुवार को यह करीब 96.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।

RBI interest rates स्वैप से क्या संकेत

इंटरेस्ट रेट स्वैप बाजार यह संकेत दे रहा है कि अगले तीन महीनों में RBI कम से कम 40 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि कर सकता है और अगले एक साल में 100 बेसिस प्वाइंट से ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद लगाई जा रही है। एक अन्य सूत्र ने कहा कि रुपये को वास्तव में मजबूत करने के लिए ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। छोटी बढ़ोतरी का ज्यादा असर नहीं होगा, जबकि इससे मांग और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है।

RBI ने ऐतिहासिक रूप से रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों को मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने से परहेज किया है। 2013 में सीमित समय के लिए मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर बढ़ाने को छोड़कर ऐसा बहुत कम हुआ है। एक चौथे सूत्र ने कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये को स्थिर करने के उपायों पर विचार कर रहा है, हालांकि जरूरी नहीं कि सभी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाए।

RBI ने इस विषय पर ईमेल से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सूत्रों ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की। पहले सूत्र ने कहा कि RBI का चालू वित्त वर्ष के लिए अप्रैल में दिया गया 6.9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का अनुमान अब घटाया जा सकता है।

4.6% के पार जा सकती है महंगाई

तेल की कीमतों में उछाल और कमजोर पड़ता रुपया भारत जैसी तेल आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव फिर बढ़ा सकते हैं। इससे RBI का चालू वर्ष के लिए 4.6 फीसदी महंगाई का अनुमान पार हो सकता है।

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दूसरे सूत्र ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अब बढ़कर करीब 5 फीसदी या उससे थोड़ा ऊपर जा सकती है। हालांकि यह अभी भी RBI के 2-6 फीसदी के दायरे में रहेगी, लेकिन 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर होगी। अप्रैल में CPI महंगाई 3.48 फीसदी रही थी।

भारत की थोक महंगाई पिछले महीने बढ़कर 8.3 फीसदी पहुंच गई थी। हालांकि इसमें तेल की हिस्सेदारी ज्यादा होती है और उपभोक्ताओं तक इसका पूरा असर अभी नहीं पहुंचा है। तीनों सूत्रों ने कहा कि नीति निर्माता यह देखना चाहते हैं कि लागत का दबाव उपभोक्ता महंगाई पर कितनी तेजी से असर डालता है।

RBI की मौद्रिक नीति समिति अगला फैसला 5 जून को सुनाएगी। गुरुवार को केंद्रीय बैंक ने अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक भी की। बैठक में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह सवाल उठाया कि क्या नीतिगत फैसलों में समय लगने को देखते हुए पहले से ब्याज दर बढ़ाना उचित हो सकता है। यह जानकारी चर्चा से जुड़े दो लोगों ने दी। हालांकि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को जून में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद नहीं है, लेकिन स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसे कुछ संस्थान दर बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं।

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First Published - May 22, 2026 | 12:44 PM IST

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