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RBI की बैंकों को चेतावनी: ‘हल्की निगरानी’ पड़ सकती है भारी, ढीले नियमों से बढ़ सकता है आर्थिक जोखिम

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RBI डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने आगाह किया है कि वित्तीय प्रणाली में ढीली निगरानी शुरुआत में फायदेमंद लग सकती है, लेकिन यह भविष्य में बड़े आर्थिक जोखिम पैदा कर सकती है

Last Updated- May 04, 2026 | 10:20 PM IST
RBI Deputy Governor Swaminathan J
भारतीय रिजर्व बैंक  के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक  के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि हल्की निगरानी वाली वित्तीय प्रणाली शुरुआत में कम लागत और तेज वृद्धि के चलते कुशल लग सकती है, लेकिन कमजोर शासन, खराब ऋण मानकों या छिपे हुए जोखिमों की स्थिति में नुकसानदायक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अंततः इसका खमियाजा न केवल शेयरधारकों और प्रबंधन को, बल्कि जमाकर्ताओं, उधार लेने वालों, करदाताओं और व्यापक अर्थव्यवस्था को भी भुगतना पड़ता है। स्वामीनाथन ने 30 अप्रैल को मद्रास स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में एक भाषण में कहा, ‘निगरानी का असल काम ऐसे परिणामों की संभावना और गंभीरता को कम करना है।’

उन्होंने कहा कि कुछ सार्वजनिक वस्तुओं का मूल्य निर्धारित करना मुश्किल होता है क्योंकि उनका सबसे बड़ा मूल्य रोकथाम में निहित होता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता एक ऐसी ही सार्वजनिक चीज है, और बैंकिंग पर्यवेक्षण उन संस्थागत तंत्रों में से एक है जिसके माध्यम से इसे संरक्षित किया जाता है।  जहां बैंकों की निगरानी की लागत तत्काल और मापने योग्य होती है, वहीं इसके लाभ अक्सर अदृश्य बने रहते हैं, जो प्रभावी निगरानी के मूल में एक विरोधाभास है।

उन्होंने कहा, ‘निगरानी की लागत अक्सर दिखाई देती है। यह अनुपालन टीमों, रिपोर्टों, ऑडिट, प्रौद्योगिकी प्रणालियों और प्रबंधन के समय के आकार में दिखाई देती है। वहीं निगरानी के लाभों को मापना कहीं अधिक कठिन है।’

उन्होंने कहा, ‘यह अच्छी निगरानी का विरोधाभास है। जब निगरानी प्रणाली अच्छी तरह से काम करती है, तो इस पर कम ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य सुर्खियां बटोरना नहीं है। इसका उद्देश्य चुपचाप विश्वास बनाए रखना है, ताकि परिवार अपने बचत को बैंकों में रख सकें, व्यवसाय ऋण प्राप्त कर सकें और वित्तीय प्रणाली बगैर अस्थिरता बनाए वास्तविक अर्थव्यवस्था का समर्थन कर सके।’

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First Published - May 4, 2026 | 10:14 PM IST

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