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को-लेंडिंग के मसलों से निपटेगी समिति, प्रमुख बैंकों और NBFC के प्रतिनिधि होंगे शामिल

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को-लेडिंग ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें कई ऋणदाता मिलकर ऋण देते हैं। इस तरह की व्यवस्था से वे ज्यादा ऋण दे सकते हैं और कर्जधारक के लिए जो​खिम कम हो जाता है।

Last Updated- May 16, 2024 | 9:39 PM IST
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वित्तीय क्षेत्र में को-लेंडिंग से जुड़े मसलों से निपटने के लिए वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को समिति गठित करने का निर्देश दिया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा, ‘हमने को-लेंडिंग से जुड़े कुछ मसलों को चिह्नित किया है और इसके लिए स्टेट बैंक से समिति बनाने को कहा गया है। इस समिति में प्रमुख बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।’

को-लेडिंग ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें कई ऋणदाता मिलकर ऋण देते हैं। इस तरह की व्यवस्था से वे ज्यादा ऋण दे सकते हैं और कर्जधारक के लिए जो​खिम कम हो जाता है। उदाहरण के लिए भारत में बैंक और एनबीएफसी मिलकर ऋण प्रदान करते हैं। दोनों पक्ष मिलकर जो​खिम और लाभ का हिस्सा बांट लेते हैं।

अधिकारी ने कहा कि स्टेट बैंक अपने एक अधिकारी को यह देखने के लिए नियुक्त करेगा कि को-लेंडिंग क्षेत्र क्यों गति नहीं पकड़ रहा है। अधिकारी ने कहा, ‘समिति इस मसले पर भी विचार करेगी कि बैंक को-लेंडिंग के क्षेत्र में क्यों हिचकिचा रहे हैं। इससे बैंकों और एनबीएफसी दोनों के लिए एक साझा जमीन तैयार होगी। बैंकों से 80 फीसदी और एनबीएफसी से 20 फीसदी धन आता है। बैंकों ने हमें सुझाव दिया है कि फर्स्ट लॉस कवर मुहैया कराया जाए, जिससे इस क्षेत्र में बैंकों का काम आसान होगा।’

गुरुवार को वित्तीय सेवा विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों- भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, नाबार्ड, सिडबी, एमएफआईएन, एनबीएफसी और कई महत्त्वपूर्ण सूक्ष्म वित्त संस्थानों के साथ बैठक की थी। सरकार के अधिकारी ने कहा ‘हमने बैंकों और एनबीएफसी को को-लेंडिंग गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।’

क्रिसिल रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि एनबीएफसी का को-लेंडिंग बहीखाता जून 2024 तक 1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है, जिसमें मध्यावधि के हिसाब से 35 से 40 फीसदी सालाना बढ़ोतरी होगी। वित्त मंत्रालय के साथ बैठक के दौरान आगामी बजट और सरकार के 100 दिन के एजेंडे के लिए विभिन्न हिस्सेदारों से राय ली गई।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘बैठक के दौरान हमने विभिन्न एजेंडा पर चर्चा की। इसमें तकनीक से लेकर साइबर सुरक्षा तक के मसलों के समाधान पर बात हुई। कुछ सुझाव भविष्य के बजट और अगली सरकार के 100 दिन के एजेंडा के लिए दर्ज किए गए।’

भारतीय रिजर्व बैंक के परियोजनाओं के वित्तपोषण के मानक के मसौदे के बारे में अधिकारी ने कहा, ‘सभी हिस्सेदार फीडबैक देंगे, जिसे एकत्र किया जाएगा और सरकार के सामने रखा जाएगा। वित्तीय सेवा विभाग भी मसौदा मानकों पर अपनी राय देगा।’

बैंकिंग नियामक के हाल के मसौदा दिशानिर्देशों में निर्माण के चरण में चरणबद्ध तरीके से 5 फीसदी स्टैंडर्ड असेट का प्रावधान करने का प्रस्ताव किया गया है। पिछले दशक में एनपीए में बढ़ोतरी इसकी एक वजह है, जिसके कारण प्रस्ताव लाया गया है।

वित्त मंत्रालय ने एनबीएफसी के अधिक ब्याज को लेकर भी चिंता जताई है। सरकार के अधिकारी ने कहा, ‘हमने एनबीएफसी की उच्च ब्याज दरों के मसले पर बात की है और उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपनी वसूली की प्रक्रिया में सुधार करें।’ बैठक के दौरान एनबीएफसी ने सरकार से बैंकों की ही तरह एनबीएफसी को यूपीआई तक पहुंच का अधिकार देने को कहा है। सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘एनबीएफसी ने क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति भी मांगी है।’

वित्त मंत्रालय ने सभी बड़े सरकारी बैंकों के गोल्ड लोन की स्थिति की भी समीक्षा की, जिसमें कोई समस्या नहीं पाई गई। अधिकारी ने कहा, ‘कुछ पीएसबी से उनके गोल्ड लोन के हिस्से की जांच करने को कहा गया और इसमें हमने कोई समस्या नहीं पाई।’

हाल में रिजर्व बैंक ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से लोन-टु-वैल्यू रेश्यो, नीलामी प्रक्रिया और नकदी देने के मामले में सख्ती से मानकों का पालन करने को कहा है। रिजर्व बैंक ने पाया कि इनमें से कुछ कंपनियां नियामकीय दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक मानकों के उल्लंघन के कारण आईआईएफएल फाइनैंस पर नियामकीय प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बैंकिंग नियामक ने एनबीएफसी के गोल्ड लोन कारोबार का आकलन किया है।

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First Published - May 16, 2024 | 9:39 PM IST

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