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नकदी पर भारी पड़ा UPI: 57% भारतीयों की पहली पसंद बना डिजिटल पेमेंट, ग्रामीण भारत में भी बढ़ी पैठ

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वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यूपीआई को नकद के मुकाबले लेनदेन का अधिक पसंदीदा माध्यम बताते हुए रुपे कार्ड के विस्तार पर बल दिया गया है

Last Updated- February 16, 2026 | 10:47 PM IST
UPI Transactions may 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक नकदी को पीछे छोड़ते हुए यूपीआई अब लेन-देन का सबसे पसंदीदा साधन बन गया है। इसमें कहा गया है कि रुपे डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को खासकर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बढ़ावा देने के लिए लक्षित कारोबारी सक्षमता कार्यक्रम की जरूरत है।

वित्तीय सेवा विभाग ने 13-14 फरवरी, 2026 को आयोजित चिंतन शिविर के दौरान रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई (पर्सन-टू-मर्चेंट) ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण 15 राज्यों के 10,378 प्रतिभागियों को शामिल करते हुए किए गए एक व्यापक प्राथमिक सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें 6,167 उपयोगकर्ता, 2,199 व्यापारी और 2,012 सेवा प्रदाता शामिल हैं, जो भारत के डिजिटल भुगतान परिवेश से जुड़े पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों में डिजिटल भुगतान को अपनाने में महत्तपूर्ण और निरंतर वृद्धि हुई है। सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों में यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) सबसे पसंदीदा लेनदेन माध्यम बनकर उभरा है। 57 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे लेनदेन में यूपीआई का उपयोग करते हैं। यह नकद लेनदेन (38 प्रतिशत) से कहीं अधिक है।

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First Published - February 16, 2026 | 10:47 PM IST

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