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भारत समेत 16 देशों पर शुल्क जांच का जो​खिम, अतिरिक्त उत्पादन अमेरिकी उद्योग को प्रभावित कर रहा!

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इस जांच में स्टील, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, मशीनरी, सेमीकंडक्टर और सोलर मॉड्यूल सहित कई क्षेत्र शामिल हैं

Last Updated- March 12, 2026 | 11:12 PM IST
India US Trade Deal

अमेरिकी व्यापार प्रतिनि​धि (यूएसटीआर) ने भारत सहित 16 व्यापार साझेदार देशों के खिलाफ शुल्क संबंधी जांच शुरू करने की आज घोषणा की। यूएसटीआर ने आरोप लगाया है कि इन देशों के विनिर्माण क्षेत्रों में ‘अतिरिक्त संरचनात्मक क्षमता और उत्पादन’ का अमेरिका के नए सिरे से औद्योगीकरण प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

यह जांच व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301(बी) के तहत की जा रही है। इसमें इसकी पड़ताल की जाएगी कि कहीं अमेरिका के व्यापार साझेदारों की नीतियां पक्षपातपूर्ण तो नहीं हैं और इससे अमेरिकी व्यापार पर बोझ तो नहीं पड़ रहा है। यदि ऐसा मिलता है तो अमेरिका जवाबी व्यापारिक उपाय कर सकता है।

इस जांच में स्टील, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, मशीनरी, सेमीकंडक्टर और सोलर मॉड्यूल सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। भारत के अलावा इन जांच के दायरे में चीन, यूरोपीय संघ, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, कोरिया, वियतनाम, ताइवान, बांग्लादेश, मेक्सिको और जापान शामिल होंगे।

इन जांचों की शुरुआत अमेरिका के शीर्ष अदालत के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा लगाए गए देश-विशिष्ट शुल्क को रद्द करने के एक महीने से भी कम समय में हुई है। अदालत के निर्णय के बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 फीसदी का व्यापक अधिभार लगा दिया था और फिर उसे 15 फीसदी तक बढ़ाने की बात कही थी।

आधिकारिक विज्ञप्ति में यूएसटीआर जेमीसन ग्रीर ने कहा, ‘अमेरिका अब उन अन्य देशों के लिए अपने औद्योगिक आधार का नुकसान नहीं होने देगा जो अतिरिक्त क्षमता और उत्पादन से जुड़ी अपनी समस्याओं का निर्यात हमारे पास कर रहे हैं। आज की ये जांचें राष्ट्रपति ट्रंप की महत्त्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को वापस देश में लाने और हमारे विनिर्माण क्षेत्रों में अमेरिकी कामगारों के लिए अच्छी वेतन वाली नौकरियां सृजित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं।’

ग्रीर ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में ये देश घरेलू स्तर पर जितना उपभोग कर सकते हैं, उससे अधिक माल का उत्पादन कर रहे हैं। परिणामस्वरूप अतिरिक्त उत्पादन अमेरिकी घरेलू उत्पादन को प्रतिस्थापित कर रहा है या विनिर्माण में निवेश और विस्तार को रोक रहा है। उन्होंने कहा, ‘कई क्षेत्रों में अमेरिका ने महत्त्वपूर्ण घरेलू उत्पादन क्षमता खो दी है या विदेशी प्रतिस्पर्धियों से चिंताजनक रूप से पिछड़ गया है।’

यूएसटीआर ने सभी 16 देशों की सरकारों से परामर्श का अनुरोध किया है, जिनकी गतिविधियों, नीतियों या प्रथाओं की जांच की जा रही है। यूएसटीआर ने कहा कि जांच के संबंध में टिप्पणियां 17 मार्च से स्वीकार की जाएंगी। इच्छुक व्यक्तियों को 15 अप्रैल तक लिखित टिप्पणियां, सुनवाई में उपस्थित होने के अनुरोध, और गवाही का सारांश प्रस्तुत करना होगा। यूएसटीआर 5 मई से इन जांचों के संबंध में सुनवाई शुरू करेगा।

भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि इंजीनियरिंग क्षेत्र पहले से ही कई अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है और धारा 301 की जांच चुनौतियों में और इजाफा करेगी। भारत के निर्यात पर इसका प्रभाव केवल जांच समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसा लगता है कि यह कदम 10 फीसदी वैश्विक शुल्क की 150 दिन की अवधि समाप्त होने पर एक नया शुल्क लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

चड्ढा ने कहा, ‘यह भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है क्योंकि स्टील, एल्युमीनियम, वाहन और वाहन कलपुर्जा जैसे उत्पादों पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाया गया 50 फीसदी शुल्क अभी भी बना हुआ है।’ उन्होंने कहा कि नवीनतम यूएसटीआर निर्णय का इरादा भारत के साथ व्यापार वार्ता के दौरान दबाव बनाने का भी हो सकता है।

वा​णि​ज्य मंत्रालय के पूर्व अधिकारी और दिल्ली स्थित थिंक टैंक जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी जांच में भारत के कई ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जहां अतिरिक्त संरचनात्मक क्षमता या निर्यात अधिशेष हो सकता है। नोटिस के मुताबिक भारत की सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता पहले से ही घरेलू मांग से लगभग तीन गुनी है। पेट्रोकेमिकल और स्टील में बढ़ती क्षमता को लेकर भी इसी तरह की चिंता जताई गई है।

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First Published - March 12, 2026 | 11:02 PM IST

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