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कम से कम देवताओं को तो राजनीति से दूर रखें : तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तय की अगली सुनवाई की तारीख

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न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने यह भी पूछा कि जब मामले की जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं तो सार्वजनिक बयान देने की क्या जरूरत थी।

Last Updated- September 30, 2024 | 9:48 PM IST
supreme court

तिरूपति मंदिर लड्डू विवाद में उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कम से कम देवताओं को तो राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने जानना चाहा कि इस बात का क्या सबूत है कि तिरुपति लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने यह भी पूछा कि जब मामले की जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं तो सार्वजनिक बयान देने की क्या जरूरत थी।

बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं सहित सभी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तीन अक्टूबर की तारीख तय की। उच्चतम न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जा सकती है।

पीठ ने कहा, ‘‘कम से कम, हम उम्मीद करते हैं कि देवताओं को राजनीति से दूर रखा जाएगा।’’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि यह आस्था का मामला है और अगर लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया है तो यह अस्वीकार्य है।

पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें तिरुपति के लड्डू बनाने में पशु चर्बी के कथित इस्तेमाल की जांच की मांग की गई है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस महीने की शुरुआत में दावा किया था कि राज्य में पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान तिरुपति के लड्डू तैयार करने में पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। इससे बड़े पैमाने पर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। वाईएसआर कांग्रेस ने आक्षेप लगाया था कि नायडू ने राजनीतिक लाभ के लिए ‘‘घृणित आरोप’’ लगाया है।

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First Published - September 30, 2024 | 2:51 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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