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दीवाली पर बिक्री 5.40 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर, स्वदेशी वस्तुओं की मांग ज्यादा

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पिछली दीवाली के मुकाबले वस्तुओं की बिक्री में 25 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि सेवाओं में 65,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई

Last Updated- October 21, 2025 | 10:26 PM IST
diwali Sale

इस साल दीवाली पर बिक्री 5.40 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछली दीवाली के मुकाबले वस्तुओं की बिक्री में 25 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि सेवाओं में 65,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से जारी एक विज्ञप्ति से यह खुलासा हुआ है। पिछले साल दीवाली पर व्यापार का आंकड़ा 4.25 लाख करोड़ रुपये का था।

यह सर्वेक्षण कैट की अनुसंधान शाखा कैट रिसर्च ऐंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा 60 प्रमुख वितरण केंद्रों में किया गया। इसमें राज्यों की राजधानियों के अलावा छोटे एवं मझोले शहरों को भी शामिल किया गया।

दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद और कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने विज्ञप्ति में कहा, ‘प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी दीवाली के आह्वान का जनता पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है। 87 फीसदी उपभोक्ताओं ने आयातित उत्पादों के मुकाबले भारत में बनी वस्तुओं को प्राथमिकता दी। परिणामस्वरूप चीन में बनी वस्तुओं की मांग में जबरदस्त गिरावट आई। व्यापारियों ने भारत में विनिर्मित उत्पादों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है।’

सेवा क्षेत्र में पैकेजिंग, आतिथ्य सेवा, कैब सेवा, यात्रा, इवेंट मैनेजमेंट, टेंट ऐंड डेकोरेशन, श्रमबल और डिलिवरी श्रे​णियों में 65,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। यह त्योहारी अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।

सर्वेक्षण में शामिल 72 फीसदी व्यापारियों ने बताया कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं, फुटवियर, वस्त्र, कन्फेक्शनरी, घर की सजावटी वस्तुओं और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर जीएसटी दरों में कटौती के कारण सीधे तौर पर बिक्री को रफ्तार मिली।

त्योहारी बिक्री के रोजगार एवं अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के बारे में बात करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि गैर-कॉरपोरेट एवं गैर-कृषि क्षेत्र भारत में वृद्धि को रफ्तार देने वाला प्रमुख इंजन है। इसमें 9 करोड़ से अधिक छोटे कारोबारी और लाखों विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं।

इस साल दीवाली पर हुए कारोबार के कारण लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और रिटेल सेवाओं में 50 लाख अस्थायी नौकरियां पैदा हुईं। कुल कारोबार में ग्रामीण एवं कस्बाई बाजार का 28 फीसदी योगदान रहा जिससे महानगरों से इतर व्यापक आ​र्थिक भागीदारी का पता चलता है।

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी के मध्य से सर्दियों के अलावा शादी-ब्याह का सीजन शुरू होने से बिक्री में तेजी आगे भी जारी रहने के आसार हैं।

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First Published - October 21, 2025 | 10:21 PM IST

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