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ECLGS 5.0: एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट को मिल सकती है ₹1,500 करोड़ तक की राहत

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यह आवंटन पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त ऋण सुविधा प्रदान करने की सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है

Last Updated- May 07, 2026 | 10:59 PM IST
aeroplane
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने आज कहा कि देश की तीन प्रमुख विमानन कंपनियां हाल में घोषित ईसीएलजीएस 5.0 योजना के तहत 1,500 करोड़ रुपये तक (प्रत्येक) का लाभ उठा सकती हैं। शेष रकम छोटी विमानन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब देश की शीर्ष तीन विमानन कंपनियां- एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट- ईंधन की बढ़ती लागत, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण कठिन परिचालन माहौल में वित्तीय दबाव झेल रही हैं।

यह आवंटन पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त ऋण सुविधा प्रदान करने की सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है। विमानन घटक का उद्देश्य विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों, हवाई क्षेत्र के बंद होने और अंतरराष्ट्रीय परिचालन में कमी के कारण पैदा हुए वित्तीय दबाव से विमानन कंपनियों को बचाना है। 

नागराजू ने मुंबई में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में कहा, ‘हमारे पास तीन प्रमुख विमानन कंपनियां हैं। हमने एक कंपनी के लिए अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है जो कुल मिलाकर 4,500 करोड़ रुपये होता है। भले ही छोटी विमानन कंपनियां 50 करोड़ रुपये या 100 करोड़ रुपये लें मगर कुल आंकड़ा 5,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा।’

विमानन क्षेत्र के लिए ईसीएलजीएस 5.0 के तहत अधिकतम ऋण सीमा प्रति उधारकर्ता 1,000 करोड़ रुपये है। इसमें समतुल्य इक्विटी निवेश के मुकाबले अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये उपलब्ध है। ऋणों की अवधि 7 साल तक है जिसमें दो साल का मोरेटोरियम शामिल है और 50 फीसदी तक ब्याज को फंडेड इंटरेस्ट टर्म लोन (एफआईटीएल) में बदलने का विकल्प है।

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) में संयुक्त सचिव मनोज मुतत्थिल अय्यप्पन ने कहा, ‘आकलन करते समय कुछ ऐसी विमानन कंपनियां भी हो सकती हैं जिन्हें पहले भी समस्याएं हुई हों। मगर इस योजना के तहत ऋण से इनकार करने का कोई कारण नहीं है। हमने विमानन कंपनियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए हैं ताकि धन का उचित उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो जिसके लिए यह दिया जा रहा है जैसे पश्चिम एशिया संकट के कारण कार्यशील पूंजी की बढ़ी हुई चुनौतियां।’

इंडिगो का समेकित शुद्ध लाभ 2025-26 की तीसरी तिमाही में एक साल पहले की समान अव​धि के मुकाबले 77.6 फीसदी घटकर 549 करोड़ रुपये रहा। 

एयर इंडिया सूचीबद्ध कंपनी नहीं है मगर उसे वित्त वर्ष 2026 में 22,000 करोड़ से अधिक घाटा होने का अनुमान है। यह घाटा वित्त वर्ष 2025 में दर्ज लगभग 10,859 करोड़ के समेकित घाटे से काफी अधिक है। सस्ती विमानन सेवा स्पाइसजेट वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में 262 करोड़ रुपये के घाटे में आ गई जबकि पिछले साल की समान अवधि में उसने 20 करोड़ लाभ दर्ज किया था।

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा उन विमानन कंपनियों के लिए है जिन्होंने पहले से बैंक ऋण ले रखे हैं। उन्होंने कहा, ‘यह कोई नई ऋण सुविधा नहीं है। बैंक उन चुनौतियों से अवगत हैं जिनका सामना विमानन कंपनियां कर रही हैं। यह केवल अतिरिक्त ऋण है जिसे सरकार द्वारा गारंटी दी जाएगी।’

भारतीय विमानन कंपनियों ने मई में अपने साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लगभग 25 फीसदी कम कर दिया क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों और पाकिस्तान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण लागत बढ़ गई है। ऐसे में उड़ान मार्ग लंबे हो गए हैं जबकि भारत में परिचालन करने वाली विदेशी विमानन कंपनियां स्थिर बनी हुई हैं और विस्तार कर रही हैं।

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भारत के विमानन क्षेत्र के लिए अपने नजरिये को ‘स्थिर’ से ‘ऋणात्मक’ करते हुए आगाह किया है कि भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती ईंधन कीमतों और मुद्रा में गिरावट के कारण वित्त वर्ष 2026 में विमानन कंपनियों के बहीखाते में तेज गिरावट आ सकती है। इक्रा ने कहा कि भारतीय विमानन उद्योग का शुद्ध घाटा वित्त वर्ष 2026 में 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह लगभग 5,500 करोड़ रुपये था।

शेट्टी ने अनुमान लगाया कि एसबीआई के जरिये इस योजना के तहत एमएसएमई के लिए 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई संभावना नहीं है कि इस योजना के तहत पात्र सभी कंपनियां इस ओर आगे बढ़ेंगी लेकिन यह एमएसएमई श्रेणी में हर किसी के लिए उपलब्ध है। अगले 8 से 10 दिनों में बैंक इस योजना को लागू करने के तौर-तरीके जारी करेंगे।

ईसीएलजीएस 5.0 मौजूदा मानक एमएसएमई उधारकर्ताओं के लिए 100 फीसदी सरकारी गारंटी और विमानन कंपनियों सहित गैर-एमएसएमई उधारकर्ताओं के लिए 90 फीसदी गारंटी प्रदान करती है। दिसंबर 2025 तक एसबीआई का एमएसएमई ऋण खाता 6 लाख करोड़ रुपये था।

नागराजू ने कहा, ‘हमने देखा है कि शैक्षिक संस्थान, रक्षा, चाय और बागवानी जैसे कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अधिकतर क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ा है। इसलिए उन्हें इस योजना की पात्रता मानदंडों से बाहर रखा गया है।’ उन्होंने कहा कि एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक सहित निजी ऋणदाताओं के भी एमएसएमई ऋण का फायदा उठाने की उम्मीद है।

ईसीएलजीएस को बुनियादी तौर पर कोविड-19 के झटके को कम करने के लिए लॉन्च किया गया था। सेट्टी ने कहा, ‘दिलचस्प है कि ईसीएलजीएस डिफॉल्ट दर औसत एमएसएमई डिफॉल्ट दर से कम थी।’ महामारी के दौर की प्रतिक्रिया के विपरीत इस बार कोई पुनर्गठन व्यवस्था की घोषणा नहीं की गई है। मगर नागराजू ने कहा कि यदि क्षेत्र में दबाव गहराता है तो सरकार इस मुद्दे पर आरबीआई से संपर्क कर सकती है।

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First Published - May 7, 2026 | 10:54 PM IST

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