केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार इस वर्ष की खरीफ फसल पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए जिलावार आकस्मिक योजना तैयार करेगी, लेकिन अब तक कोई चिंता की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि 2026 के मॉनसून सत्र के लिए अभी मौसम विभाग का अंतिम अनुमान नहीं आया है।
उन्होंने साथ ही एकीकृत खेती और दलहनों तथा तिलहनों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया। मंत्री ने 2 दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान कहा, ‘ चिंता करने के बजाय तैयारी जरूरी है। प्रभावित जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं बनाई जाएंगी और जहां आवश्यक होगा, वहां फसलों में बदलाव पर विचार किया जाएगा।’
उन्होंने कहा कि मंत्रालय वैकल्पिक फसलों के लिए जिलों की पहचान करने और अल नीनो के प्रभाव की स्थिति में बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में है। मौसम विभाग ने 13 अप्रैल को जारी अपने प्रथम चरण के पूर्वानुमान में 2026 के लिए सामान्य से कम दक्षिण पश्चिम मॉनसून का अनुमान लगाया है, जिसमें वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने मई-जुलाई के बीच अल नीनो जैसी परिस्थितियों की वापसी की संभावना जताई है।
अमेरिका स्थित राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) ने 11 मई के अपने ‘ईएनएसओ अपडेट’ में कहा कि मई-जून के दौरान अल नीनो परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं और वर्ष के अंत तक बनी रह सकती हैं। अल नीनो की स्थिति प्रशांत महासागर के पूर्वी उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है। यह आमतौर पर भारत में अधिक गर्म और शुष्क मौसम से संबंधित रहता है।
देश के कुछ हिस्सों में खरीफ (गर्मी की फसल) की बोआई शुरू हो चुकी है, हालांकि यह अभी प्रारंभिक चरण में है। जिन क्षेत्रों में मॉनसून से पहले की वर्षा हुई है, वहां किसान विशेष रूप से कम अवधि वाली फसलों जैसे दालें, मोटे अनाज और कुछ कपास की शुरुआती बोआई की तैयारी कर रहे हैं। सामान्यतः खरीफ बोआई जून में शुरू होती है और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगमन के साथ जून-जुलाई में अपने चरम पर पहुंचती है।
चौहान ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल को प्रोत्साहन देने के लिए देशव्यापी खेत बचाओ अभियान शुरू करेगी। इस अभियान का मकसद मिट्टी को उर्वरा बनाए रखना भी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बोआई के सीजन में खाद की जरूरतों के लिए पर्याप्त इंतजाम कर लिया है।
चौहान ने कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारत 2025-26 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 37.656 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड हासिल करने की दिशा में अग्रसर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.88 करोड़ टन अधिक है।