facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

मास्टर प्लान तैयार! अब 543 नहीं, लोक सभा में होंगे 850 सांसद; 2011 की जनगणना बनेगी परिसीमन का आधार

Advertisement

सरकार महिला आरक्षण को अमलीजामा पहनाने के लिए लोक सभा सीटें बढ़ाकर 850 करने और 2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन आयोग बनाने का विधेयक पेश करेगी

Last Updated- April 14, 2026 | 10:41 PM IST
Parliament
भारतीय संसद | फाइल फोटो

लोक सभा  और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इन्हीं से संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।

विधेयकों की प्रतियां सांसदों को वितरित की गई हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनयम में संशोधन करने वाले विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। विधेयक संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसमें कहा गया है कि लोक सभा  में राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए 815 से अधिक सदस्य नहीं होंगे और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जो संसद द्वारा पारित कानून के तहत प्रदान किए गए तरीके से चुने जाएंगे।

विधेयक के अनुसार, ‘जनसंख्या’ अभिव्यक्ति से तात्पर्य उस जनगणना में सुनिश्चित की गई जनसंख्या से है, जिसके संबंधित आंकड़े प्रकाशित किए जा चुके हैं। फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं। महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को शीघ्रता से लागू करने के लिए सरकार गुरुवार को लोक सभा  में एक संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन कानून से जुड़ा एक विधेयक और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुदुच्चेरी (विधान सभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों) के लिए एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है।

मसौदा संविधान संशोधन विधेयक में कहा गया है, ‘अत: प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य लोक सभा, राज्यों की विधान सभाओं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं (जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी शामिल हैं) के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करना है। यह आरक्षण उस परिसीमन कवायद के माध्यम से लागू किया जाएगा, जो नवीनतम प्रकाशित जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित होगा।’ 

सरकार परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेगी, जिसके तहत केंद्र सरकार नवीनतम जनगणना आंकड़ों के आधार पर और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए लोक सभा  तथा विधान सभाओं में सीटों के निर्धारण के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन कर सकेगी। नए विधेयक के कई प्रावधान 2002 के कानून के समान हैं। इस विधेयक के माध्यम से 2002 के परिसीमन कानून को निरस्त कर दिया जाएगा। परिसीमन विधेयक, 2026 के मसौदे के अनुसार, ‘केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक आयोग का गठन कर सकती है, जिसे परिसीमन आयोग कहा जाएगा।

आयोग में एक सदस्य वह होगा, जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (खुद) या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा नामित एक निर्वाचन आयुक्त, पदेन सदस्य होंगे और राज्य चुनाव संबंधित राज्य का आयुक्त भी पदेन सदस्य होगा।’

विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा आयोग का कार्यकाल निर्दिष्ट कर सकती है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार, आयोग के अनुरोध पर आयोग का कार्यकाल उस अवधि के लिए बढ़ा सकती है, जिसे वह आवश्यक समझे। इस विधेयक के मुताबिक, ‘यह परिसीमन आयोग का कर्तव्य होगा कि वह नवीनतम जनगणना के आंकड़े के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लोक सभा  में सीटों का आवंटन, प्रत्येक राज्य की विधान सभा में सीटों की कुल संख्या और लोक सभा  और विधान सभा चुनाव के उद्देश्य से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करने का पुन: समायोजन करेगा।’

सरकार ये विधेयक उस समय पेश करने जा रही है जब कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने इन विधेयक को लाने के समय और प्रस्तावित परिसीमन को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की सरकार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधान सभा चुनावों में फायदा हासिल करने और महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन थोपने का प्रयास कर रही है। 

Advertisement
First Published - April 14, 2026 | 10:27 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement