facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Military Drone Deal: भारत की सबसे बड़ी ड्रोन डील की तैयारी! 2 अरब डॉलर से ज्यादा के ऑर्डर संभव

Advertisement

नए ऑर्डर फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत दिए जा सकते हैं, जिसे तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है

Last Updated- June 03, 2026 | 8:10 PM IST
Drone
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Military Drone Deal: भारत इस साल घरेलू कंपनियों से 2 अरब डॉलर (करीब 17,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा मूल्य के सैन्य ड्रोन (military drone) खरीदने का आदेश दे सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सरकार के साथ काम करने वाले एक उद्योग संगठन के हवाले से बताया कि यह अब तक की सबसे बड़ी ड्रोन खरीद होगी। वैश्विक और क्षेत्रीय संघर्षों के बढ़ने से सैन्य ड्रोन की मांग में तेजी आई है।

उद्योग संगठन के अध्यक्ष स्मित शाह ने बताया कि इस खरीद की योजना एडवांस स्टेज में है और ड्रोन की सप्लाई अगले 18 से 24 महीनों के भीतर किए जाने की संभावना है। यह हाल के वर्षों में सरकार द्वारा दिए गए 30 अरब रुपये (करीब 313 मिलियन डॉलर) के टैक्टिकल क्लास के ड्रोन ऑर्डर की तुलना में मूल्य के लिहाज से काफी बड़ी वृद्धि होगी।

फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट से होगी ड्रोन खरीद 

ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा, “अगले चरण में भारत में टैक्टिकल ड्रोन की खरीद 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा, यानी 2 अरब डॉलर से ज्यादा की हो सकती है।” ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया 550 से ज्यादा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है और सरकार के साथ मिलकर काम करता है।

शाह ने बताया कि नए ऑर्डर फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत दिए जा सकते हैं, जिसे तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत ड्रोन की सप्लाई संभवतः 24 महीनों के भीतर करनी होगी।

इस संभावित खरीद आदेश पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का रक्षा मंत्रालय ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। इस प्रस्तावित सौदे की जानकारी सबसे पहले रॉयटर्स ने दी है।

Also Read: Cabinet Decision: ₹24,000 करोड़ से ज्यादा के 4 हाईवे प्रोजेक्ट मंजूर, इन राज्यों को होगा बड़ा फायदा

कम लागत वाले ड्रोन की आक्रामक क्षमता पर बढ़ा फोकस

भारत की यह पहल पिछले वर्ष मई में कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद तेज हुई है। उस दौरान दोनों देशों ने पहली बार बड़े पैमाने पर मानव रहित हवाई वाहनों (ड्रोन) का इस्तेमाल किया था, जिससे कम लागत वाले ड्रोन की आक्रामक और रणनीतिक क्षमता उजागर हुई।

यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों ने भी दुनिया भर में ड्रोन अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है। इससे ड्रोन की लागत कम हुई है और युद्धक्षेत्र की रणनीतियों में बड़ा बदलाव आया है।

मार्च में रक्षा मंत्रालय ने परिवहन विमानों, मिसाइल सिस्टम्स और “रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयक्राफ्ट” (सशस्त्र ड्रोन) की खरीद के लिए करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये (24.85 अरब डॉलर) के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि मंत्रालय ने इस राशि का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया था।

एडवांस मानव रहित हवाई और कम दूरी की मिसाइल सिस्टम्स का निर्माण करने वाली आईजी डिफेंस के वरिष्ठ अधिकारी रमेश चंद्र पाधी ने कहा, “आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन एक फोर्स मल्टीप्लायर की भूमिका निभाते हैं।”

भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भारतीय सेना बड़े पैमाने पर ड्रोन को शामिल करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए आपातकालीन या फास्ट-ट्रैक खरीद व्यवस्था का सहारा ले रही है।”

भारत में तेजी से बढ़ रहा ड्रोन उद्योग

भारत में इस समय 600 से ज्यादा कंपनियां ड्रोन और उनसे जुड़े पुर्जों का निर्माण कर रही हैं, जिनमें 100 से ज्यादा कंपनियां डिफेंस सेक्टर के लिए ड्रोन डेवलप करने पर केंद्रित हैं।

इनमें बड़े औद्योगिक समूहों से लेकर स्टार्टअप्स तक शामिल हैं। प्रमुख कंपनियों में Adani Group, Larsen & Toubro और Tata Advanced Systems जैसी कंपनियां शामिल हैं। वहीं, ideaForge, Newspace Research और Asteria Aerospace जैसे स्टार्टअप भी इस सेक्टर में एक्टिव हैं।

ये कंपनियां निगरानी (रेकी), लॉजिस्टिक्स, लोइटरिंग म्यूनिशन (भटककर लक्ष्य भेदने वाले हथियार), प्रिसिजन-स्ट्राइक ड्रोन और महत्वपूर्ण ड्रोन कंपोनेंट्स विकसित कर रही हैं।

हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा खरीद प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं, ताकि ड्रोन जैसे आधुनिक सैन्य उपकरणों की खरीद तेजी से हो सके। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के साथ हुए संघर्षों में निगरानी और सटीक हमले की क्षमताओं में कमियां सामने आने के बाद सरकार ने ड्रोन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज किया है।

भारत अब आपातकालीन खरीद अधिकारों और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) के तहत तेज मंजूरी तंत्र का अधिक उपयोग कर रही है। इससे रक्षा खरीद में पहले जहां वर्षों लग जाते थे, वहीं अब कई मामलों में प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी की जा रही है।

साथ ही, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की नीति के तहत सरकार भारत में विकसित और निर्मित सिस्टम्स को प्राथमिकता दे रही है, जिससे स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूती मिल रही है।

Advertisement
First Published - June 3, 2026 | 8:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement