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होर्मुज स्ट्रेट खुलने की उम्मीद से भारत को राहत, तेल कीमतों में गिरावट लेकिन अनिश्चितता बरकरार

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अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर पहुंचने के साथ ही भारत होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईंधन की आपूर्ति बहाल होने के लिए काफी आशा​न्वित है

Last Updated- June 15, 2026 | 11:06 PM IST
Strait of Hormuz crisis

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर पहुंचने के साथ ही भारत होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईंधन की आपूर्ति बहाल होने के लिए काफी आशा​न्वित है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश के लिए खरीद और परिवहन लागत में कमी आएगी। शुरुआती मसौदे पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत की ओर आने वाला पहला तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक पोत ‘दिशा’ आज होर्मुज स्ट्रेट से सुर​क्षित निकल गया। इसका प्रबंधन शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा किया जाता है। यह जहाज 62,370 टन एलएनजी लेकर आ रहा है जिसे 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है।

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारत, अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीदों के बीच होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का इंतजार कर रहा है। भारत ने उस क्षेत्र में फंसे अपने जहाजों को निकालने की तैयारी भी कर ली है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश शर्मा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि होर्मुज के पश्चिम में 325 नाविकों के साथ 13 भारतीय-ध्वजांकित जहाज फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष की शुरुआत से अब तक 10 भारतीय ध्वजांकित और 5 भारत आने वाले जहाजों ने सुरक्षित तौर पर इस जलमार्ग को पार किया है।

अमेरिका-ईरान समझौते के बीच बेंचमार्क ब्रेंट की कीमतों में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट आई और यह लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इससे भारत को आर्थिक राहत की उम्मीद जगी है। खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बा​धित होने के कारण भारत का ईंधन आयात बिल काफी बढ़ गया है। इसने मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ा दिया, रुपये को कमजोर किया और रिफाइनरियों को दूर के बाजारों से वैकल्पिक आपूर्ति लेने के लिए मजबूर किया।

ईवाई इंडिया के पार्टनर (कर एवं आ​र्थिक नीति) रजनीश गुप्ता ने कहा, ‘भू-राजनीतिक तनाव में नरमी और प्रमुख व्यापार मार्गों के बहाल होने से वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट आएगी। इससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, राजकोषीय घाटे पर दबाव को कम करने और रुपये को सहारा देने में मदद मिलेगी।’

युद्ध विराम के लिए अमेरिका द्वारा किए गए पहले के प्रयास विफल रहे हैं। ऐसे में शुरुआती उम्मीद के बावजूद इस समझौते के लागू होने और होर्मुज के रास्ते यातायात के सामान्य होने के बारे में चिंताएं अभी भी बरकरार हैं। रेस्टड एनर्जी के मुख्य अर्थशास्त्री क्लाउडियो गैलिमबर्टी ने कहा, ‘बाजारों ने पहले भी इस तरह के परिदृश्य देखे हैं जहां घोषणा के बाद शुरुआत उछाल आई लेकिन कार्यान्वयन संबंधी जोखिम के उभरने के साथ ही उत्साह फीका पड़ गया।’

तेल बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति सामान्य होने में देरी और मांग बढ़ने के कारण आने वाले सप्ताहों में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहेंगी। एमके ग्लोबल की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘होर्मुज के जरिरये आपूर्ति को सामान्य होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। टैंकर की उपलब्धता, बीमा लागत, मंजूरी आदि के कारण शुरू में आपूर्ति की रफ्तार सुस्त रहेगी। इसके अलावा बंद पड़े तेल कुओं से उत्पादन को बहाल करने में भी समय लगेगा।’

एमके ग्लोबल की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 6.3 फीसदी, मुख्य मुद्रास्फीति 5.1 फीसदी और चालू खाते का घाटा बनाम जीडीपी अनुपात 2.3 फीसदी रहने की उम्मीद है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने शांति समझौते का स्वागत किया और इसे समुद्री आवाजाही में स्थिरता लाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया। संगठन ने एक बयान में कहा, ‘यह समझौता आईएमओ को क्षेत्र में फंसे हजारों नाविकों को निकालने की अपनी योजना को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। संगठन इस योजना को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सदस्य देशों और भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। मगर इसके कार्यान्वयन के लिए आवश्यक सुरक्षा एवं गारंटी सुनिश्चित करने में समय लगेगा।’

बहरहाल शिपिंग लाइन और माल ढुलाई करने वालों के लिए अभी भी सावधानी बरतनी होगी। एक ऐसेट-ओन्ड प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक्स कंपनी सारजक कंटेनर लाइंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आशिष शेठ ने कहा, ‘जाहिर तौर पर यह घोषणा वैश्विक शिपिंग के लिए एक सकारात्मक कदम है लेकिन बाजार की नजर समझौते से अधिक विश्वास बहाली पर होगी। क्षमता की बहाली अपेक्षाकृत जल्दी हो सकती है लेकिन बीमाकर्ता, जहाज मालिक और चार्टरर्स के सामान्य संचालन की राह पर लौटने से पहले स्थिरता की जरूरत होगी। हम उम्मीद करते हैं कि यह समझौता निकट अवधि में माल ढुलाई बाजारों पर दबाव कम करेगा लेकिन दरों को तुरंत संकट-पूर्व स्तरों पर वापस नहीं ला पाएगा।’

वैश्विक स्तर पर व्यस्त सीजन होने के कारण माल ढुलाई की दरें फिलहाल ऊंची बनी हुई हैं। कई शिपिंग लाइन ने व्यस्त सीजन के मद्देनजर सरचार्ज लागू किया है। शेठ ने कहा कि माल ढुलाई के लिहाज से देखा जाए तो इस घोषणा से आगे की वृद्धि पर अंकुश लगेगा मगर तत्काल कोई खास सुधार नहीं होगा।

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First Published - June 15, 2026 | 10:59 PM IST

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