वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में अपने बजट भाषण में 7 नए हाई स्पीड रेल (एचएसआर) कॉरिडोर की घोषणा की थी। इन कॉरिडोर की लागत 16 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। ऐसे में सरकार इस क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने और इन परियोजनाओं पर सरकारी खर्च को कम करने की कोशिश कर रही है।
मामले से अवगत कम से कम तीन अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में कम से कम एक कॉरिडोर के निर्माण की संभावनाएं तलाश रही है।
प्रस्तावित कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 4,000 किलोमीटर होगी। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलूरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलूरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं।
एक अधिकारी के अनुसार, बजट घोषणा से लगभग दो महीने पहले दिसंबर में एक उच्चस्तरीय बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया था। रेल मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हां, हम इस विकल्प पर सक्रियता से विचार कर रहे हैं। यह एक चुनौती है क्योंकि वैश्विक स्तर पर हाई स्पीड रेल की सफल परियोजनाओं के बहुत कम उदाहरण हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी और महत्त्वपूर्ण है कि हम इसके लिए तमाम संभावनाओं पर विचार करें।’
अधिकारी ने बताया कि रेलवे को ऐसे तरीके तलाशने के लिए कहा गया है जिनसे निजी कंपनियों के लिए उन जोखिम एवं आकस्मिकताओं को दूर किया जा सके जो आम तौर पर शुरुआती चरणों में भूमि से संबंधित होती हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘ऐसा सुझाव दिया गया है कि रेलवे को एक ऐसे मॉडल पर विचार करना चाहिए जहां रेलवे भूमि उपलब्ध कराए और निजी क्षेत्र निर्माण, संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभाले।’ इस संबंध में जानकारी के लिए रेल मंत्रालय को फरवरी में भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परियोजनाओं के लिए रिटर्न दर को समझना भी एक प्रमुख चुनौती हो सकती है क्योंकि भारत में बुलेट ट्रेन के रूप में चर्चित हाई स्पीडउ रेल के लिए एक भी कॉरिडोर फिलहाल चालू नहीं है।
मुंबई-अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की एचएसआर परियोजना में काफी देरी पहले ही हो चुकी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देरी का कारण शिवसेना (उद्धव) नेता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार के साथ राजनीतिक मतभेदों के कारण भूमि अधिग्रहण में देरी को बताया है।
सरकार 2027 तक सूरत और वापी के बीच 100 किलोमीटर का खंड खोलने पर विचार करेगी। इस दौरान कॉरिडोर की अनुमानित लागत भी बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो गई है। रेल मंत्रालय ने पिछले महीने इन नए कॉरिडोर की वित्तीय व्यवहार्यता का पता लगाने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में तेजी लाने के लिए एक समीक्षा बैठक भी की थी।
पूर्व मध्य रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी के अनुसार, बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित मॉडल बिल्कुल नया और व्यवहार्य है। उन्होंने कहा, ‘ऐसा संभव है बशर्ते भूखंड सुनिश्चित करने के अलावा सरकार 9 फीसदी (कर मुक्त) रिटर्न दर की गारंटी भी दे। उसमें यह प्रावधान भी हो कि अगर रिटर्न अधिक होता तो उसे सरकार ले लेगी।’