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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संयुक्त बयान जल्द होगा जारी, लेबर इंटेंसिव उद्योगों के लिए खुले बड़े अवसर: पीयूष गोयल

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गोयल ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के लिए बेहतरीन, विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी हासिल करने के अभूतपूर्व अवसर के द्वार खोलता है

Last Updated- February 03, 2026 | 11:06 PM IST
Piyush Goyal

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में कृषि और डेरी जैसे अपने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष जल्द ही संयुक्त बयान जारी करने पर काम कर रहे हैं, जिसमें समझौते का पूरा ब्योरा होगा।

गोयल ने कहा, ‘यह एक ऐसा करार है जो हर भारतीय को गर्व महसूस कराएगा, हर भारतीय के हितों की रक्षा करेगा और भारत के सभी लोगों के लिए बड़े अवसर का मार्ग प्रशस्त करेगा। साथ ही हमारे कृषि और डेरी क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करेगा।’

सीएनबीसी से बात करते हुए अमेरिका के व्यापार प्रतिनि​धि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत में दुनिया के हर देश की तरह कुछ खास क्षेत्र हैं जिन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है। उन्होंने आगे कहा, ‘वे इसे नियंत्रित करते रहेंगे हम पहुंच बढ़ाने पर काम करते रहेंगे।’

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बीते सोमवार को कहा था कि भारत शुल्क ‘शून्य’ कर देगा मगर पता चला है कि भारत औद्योगिक और कृ​षि सामान पर शुल्क में काफी कमी करेगा जबकि संवेदनशील क्षेत्रों के हितों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा और उसकी सुरक्षा करना जारी रखेगा। उदाहरण के लिए भारत डेरी, पोल्ट्री, अनाज, सोया मील, मक्का आदि पर शुल्क में छूट नहीं देगा।

कुछ कृ​षि उत्पादों जिन्हें पारंपरिक रूप से संवेदनशील नहीं माना जाता है, उन पर शुल्क घटाकर शून्य किया जाएगा जबकि ज्यादा संवेदनशील उत्पादों के मामले में शुल्क धीरे-धीरे कम किया जाएगा और कोटा तय किया जाएगा।

ग्रीर ने दावा किया, ‘भारत में औद्योगिक सामान पर औसत शुल्क 13.5 फीसदी है। यह 98-99 फीसदी उत्पाद के लिए शून्य होने वाला है।’

गोयल ने कहा कि यह व्यापार करार टेक्सटाइल, प्लास्टिक, कपड़े, होम डेकोर, चमड़ा और फुटवियर, रत्न और आभूषण, ऑर्गेनिक रसायन, रबर के सामान, मशीनरी, विमान के कलपुर्जा जैसे श्रम गहन क्षेत्रों के लिए बड़े मौके खोलेगा क्योंकि शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाएगा। अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई से ज्यादा है।

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First Published - February 3, 2026 | 10:35 PM IST

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