केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि रेल मंत्रालय ने निम्नस्तरीय प्रदर्शन पर नकेल कसने के लिए निर्माण कार्यों के पात्रता मानदंडों में बदलाव किया है।
नए पैमानों के अनुसार ठेकेदार द्वारा तैयार की गई किसी एक परियोजना का मूल्य दी जा रही परियोजना के मूल्य का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए। पहले यह सीमा 35 प्रतिशत थी। इससे बड़ी परियोजनाओं पर काम करने की क्षमता वाली फर्में ही इस तरह के कार्यों के लिए बोली लगा सकेंगी।
वैष्णव ने कहा, ‘इसके अलावा संबंधित ठेकेदार के अब तक किए काम का कम से कम 20 प्रतिशत रेलवे से जुडा होना चाहिए क्योंकि राजमार्ग, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे क्षेत्रों में अलग किस्म की जटिलताएं होती हैं।’मंत्री ने कहा कि इसके पहले मंत्रालय ने पाया कि कई ठेकेदारों को बड़े ठेके मिल गए, लेकिन काम पूरा करने में उन्हें दिक्कत आई क्योंकि उन्हें रेलवे का काम करने का अनुभव नहीं था। उन्होंने समर्पित माल ढुलाई गलियारों का उदारहण देते हुए कहा कि इसकी वजह से कई ठेकेदारों ने देरी से काम पूरा किया।
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआई) ने 2022 में पश्चिमी गलियारे के एक हिस्से में देरी के कारण टाटा प्रोजेक्ट्स के नेतृत्त्व वाले कंसोर्टियम को समाप्त करने का नोटिस जारी किया था।
हालांकि बाद में उसी एजेंसी से काम कराते रहने का फैसला किया गया और तीन साल की देरी के बाद वह काम अब जल्द पूरा होने की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि नई शर्तों के साथ रेलवे अब ऐसी स्थिति से बचना चाहता है। मंत्रालय ने बोली लगाने के लिए परियोजना के मूल्य की 2 प्रतिशत अमानत राशि तय की है ताकि केवल गैर गंभीर ठेकेदार ही बोलियां लगाएं और निविदा की प्रक्रिया में भी ऐसे ही लोग आएं।
मेट्रो परियोजनाओं के लिए सफल बेहतर प्रथाओं से प्रेरणा लेते हुए वैष्णव ने 10 करोड़ रुपये से अधिक की सभी परियोजनाओं के लिए बोली क्षमता का अनिवार्य मूल्यांकन भी शुरू किया है और भ्रष्ट, धोखाधड़ी और प्रतिस्पर्धी-विरोधी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले सख्त दंडात्मक प्रावधान पेश किए गए हैं।
एक व्यापक सुधार योजना के तहत किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले एक विस्तृत कार्य योजना को अनिवार्य किया गया है, जिससे बेहतर निगरानी हो सके और समय पर निष्पादन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, मंत्रालय ने अनुमेय उप अनुबंध सीमा को 70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया है।
वैष्णव ने कहा, ‘ठेकेदारों को अब काम का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा सीधे अपनी देखरेख में करना होगा, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और बोली हासिल करने के बाद अनुबंध दूसरे को देने की प्रथा कम होगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय ने अत्यधिक आक्रामक बोली से निपटने के लिए नीति लागू की है।
रेलवे अब यात्रियों को ट्रेन के अपने मूल स्टेशन से प्रस्थान करने से 30 मिनट पहले तक डिजिटल रूप से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलने की अनुमति देगा।
पहले यात्री चार्ट तैयार होने से पहले ही बोर्डिंग बिंदु बदल सकते थे। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई यात्री मूल स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पाता है, तो वह अगले सुविधाजनक स्टेशन का चयन कर सकता है और अपनी पुष्ट सीट खोए बिना ट्रेन में चढ़ सकता है।
यात्रियों को टिकट रद्द करने के लिए अब कम वक्त मिलेगा। ट्रेन के प्रस्थान से 48, 12 और 4 घंटे पहले के रद्दीकरण की समय सीमा को क्रमशः 72, 24 और 8 घंटे कर दिया गया है।