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Monsoon Update 2026: देश में इस साल सामान्य से कम होगी बारिश, IMD ने जताई अल नीनो की आशंका

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भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान लगाया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है

Last Updated- April 13, 2026 | 10:38 PM IST
Rain
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत मौसम विभाग ने आज कहा कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के कुल मिलाकर सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। साल 2023 के बाद पहली बार ऐसा अनुमान जाहिर किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि इस दौरान बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की 92 फीसदी रहने के आसार हैं।

मौसम विभाग ने यह पूर्वानुमान 5 फीसदी अधिक या कम की मॉडल त्रुटि के साथ जारी किया है। विभाग ने कहा कि मुख्य तौर पर जून से सितंबर महीनों के दौरान अल नीनो की स्थितियां बनने के कारण ऐसा होगा। विभाग ने अपने पूर्वानुमान में यह भी कहा है कि पूर्वोत्तर, पश्चिमोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में इस साल बारिश सामान्य से कम होने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार चार महीने के मॉनसून सत्र के लिए एलपीए 87 सेंटीमीटर है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर मौसम विभाग का पूर्वानुमान सटीक रहा तो इस साल मॉनसून सीजन के दौरान देश भर में औसत बारिश लगभग 80.04 सेंटीमीटर हो सकती है। विभाग के अनुसार, देश भर में कुल मिलाकर एलपीए के 90 से 95 फीसदी के बीच बारिश को सामान्य से कम माना जाता है।

मौसम विभाग ने यह भी कहा कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के कमजोर रहने की 35 फीसदी संभावना है यानी यह एलपीए के 90 फीसदी से भी कम रहेगा। इसके सामान्य से कमजोर रहने की संभावना 31 फीसदी यानी एलपीए का 90 से 95 फीसदी है जबकि इसके सामान्य, सामान्य से अधिक या अत्यधिक रहने की संभावना कुल मिलाकर 34 फीसदी है।

हालांकि पिछले आंकड़े बताते हैं कि सामान्य से कम मॉनसून वाले वर्षों में खरीफ का उत्पादन कम नहीं होता है बशर्ते बारिश का समय, वितरण और फैलाव असमान न हो। मगर गैर-सिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए जोखिम हो सकता है।

दलहन और तिलहन का कम उत्पादन इन दोनों वस्तुओं के आयात बिल को बढ़ा सकता है और खाद्य मुद्रास्फीति पर असर डाल सकता है। इससे समग्र आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।

भारत में होने वाली कुल सालाना बारिश में मॉनसून का योगदान 70 फीसदी से अधिक होता है। इसलिए इसे देश के कृषि क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है। मगर हाल के वर्षों में सिंचाई कवरेज में काफी सुधार हुआ है और वह वित वर्ष 2016 से 2021 के बीच सकल सिंचित क्षेत्र (जीसीए) के 49.3 फीसदी से बढ़कर 55 फीसदी हो चुका है।

मौसम विभाग मई के अंतिम सप्ताह में एक अद्यतन पूर्वानुमान जारी करेगा जिसमें 2026 के मॉनसून की शुरुआत की तारीख का भी पूर्वानुमान होगा।

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First Published - April 13, 2026 | 10:17 PM IST

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