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प्ला​स्टिक नोटों की ओर RBI का कदम, नोट छपाई लागत घटाने और टिकाऊ करेंसी पर जोर

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सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे पर केंद्रीय बैंक की पटना और मुंबई में हुई पिछली दो बोर्ड बैठकों में चर्चा हुई

Last Updated- May 28, 2026 | 10:40 PM IST
Notes

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पिछले कुछ वर्षों में करेंसी नोटों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पॉलिमर नोट लाने पर फिर से विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे पर केंद्रीय बैंक की पटना और मुंबई में हुई पिछली दो बोर्ड बैठकों में चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि प्लास्टिक के नोट बनाने में खर्च कम आएगा और वे लंबे समय तक चलेंगे। प्ला​स्टिक नोटों के सार्वजनिक प्रयोग का परीक्षण शुरू करने की घोषणा जल्द हो सकती है।

घटनाक्रम से अवगत सूत्र ने बताया, ‘उत्पादन लागत में स्पष्ट लाभ है। साथ ही एटीएम पॉलिमर आधारित नोट भी निकाल सकेंगे। हमारे पास अब इसके लिए आवश्यक संसाधन मौजूद हैं।’ आरबीआई ने कहा था कि 2024-25 के दौरान नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और 2023-24 में यह खर्च 5,101.4 करोड़ रुपये रहा। इसका मुख्य कारण नोटों की छपाई मांग में वृद्धि थी।

नोटों को लंबा चलाने के लिए पॉलिमर सामग्री का उपयोग महत्त्वपूर्ण है। फटे-पुराने नोटों का निपटान उच्च स्तर पर बना हुआ है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 में 2,38,563 लाख फटे-पुराने नोटों का निपटान किया गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 2,12,493 लाख नोटों से अधिक है। इनमें से अधिकांश फटे-पुराने नोट 500 रुपये के थे, उसके बाद 100 रुपये के नोट थे।

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में 10 रुपये और 20 रुपये जैसे कम मूल्य वाले नोटों की काफी मांग देखी गई है। हालांकि चलन में मौजूद कुल नोटों में ऐसे नोटों का हिस्सा कम ही रहा है। उदाहरण के लिए मूल्य के हिसाब से पिछले दो वर्षों में कुल चलन वाले नोटों में 10 रुपये के नोट का हिस्सा 0.7 फीसदी रहा जबकि 20 रुपये के नोट का हिस्सा 0.8 फीसदी रहा।

सूत्रों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने सिक्कों के चलन को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। सिक्कों की कुल आपूर्ति 2023-24 में 12,056 लाख से बढ़कर 2024-25 में 15,000 लाख हो गई, जिनमें से 8,000 लाख 5 रुपये के सिक्के और उसके बाद 4,000 लाख 20 रुपये के सिक्के थे। साल 2012 में तत्कालीन सरकार ने 5 शहरों में प्रायोगिक तौर पर पॉलिमर से बने 10 रुपये के एक अरब नोट जारी करने का निर्णय लिया था।

साल 2012 में तत्कालीन सरकार ने कहा था कि प्लास्टिक नोटों को जारी करने का प्राथमिक उद्देश्य उनकी आयु बढ़ाना है न कि नकली नोटों से निपटना। लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण इस परियोजना को रोक दिया गया था। पिछले एक दशक में हालात बदल गए हैं।

सूत्रों के अनुसार तकनीक अब कोई चुनौती नहीं रही और ऐसे समाधान खोज लिए गए हैं जिनसे स्वचालित टेलर मशीनें ऐसे नोटों की पहचान कर सकती हैं।  दुनिया में लगभग 60 देश ऐसे हैं जिन्होंने पॉलिमर नोटों का उपयोग शुरू कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 1988 में पॉलिमर नोट जारी किया था। इसके बाद सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया भी इसी तरह के नोट लेकर आए।

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First Published - May 28, 2026 | 10:35 PM IST

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