facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Sukhoi Su 57 बन सकता है वायु सेना का ब्रह्मास्त्र! स्क्वाड्रन की भारी कमी के बीच IAF के पास एकमात्र विकल्प

Advertisement

पड़ोसी देशों की स्टेल्थ चुनौती और लड़ाकू स्क्वाड्रन की कमी से निपटने के लिए भारतीय वायु सेना के लिए रूस का सुखोई एसयू-57 फिलहाल एकमात्र व्यावहारिक विकल्प नजर आ रहा है

Last Updated- May 17, 2026 | 10:28 PM IST
Sukhoi Su 57
सुखोई एसयू-57 लड़ाकू विमान | फाइल फोटो

रडार की पकड़ में नहीं आने वाले लड़ाकू विमानों की बढ़ती अहमियत के बीच रूस का सुखोई एसयू-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए फिलहाल एकमात्र ठोस विकल्प नजर आ रहा है। एक रक्षा सूत्र ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को नाम न छापने की शर्त पर यह बताया कि भारत अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर तेजी से काम कर रहा है। 

सूत्र ने बताया कि फ्रांसीसी दसॉ राफेल विमानों की खरीदारी समय रहते पूरी होना 4.5 पीढ़ी की हवाई ताकत मजबूत करने और स्क्वाड्रन की संख्या में गिरावट को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। यह बात ऐसे समय में उठी है जब ऐसी खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान की वायु सेना चीन से स्टेल्थ  (रडार की जद में नहीं आने वाले विमान) लड़ाकू विमान खरीदने के लिए कदम बढ़ा चुकी है।

सूत्र ने बताया, ‘भारतीय वायु सेना अत्याधुनिक तकनीक से लैस हथियारों की खरीद कर रही है। किसी दूसरे देश की देखा-देखी ऐसा नहीं हो रहा। हालांकि, हमारे पड़ोस में स्टेल्थ तकनीक पहले ही आ चुकी है और भारतीय वायु सेना को अपनी आवश्यकताओं के मुताबिक रडार से बचने वाले लड़ाकू विमानों की काट तलाशनी होगी।’

उन्होंने यह भी कहा, ‘स्वदेशी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है। ऐसे में एसयू-57 ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है जो कम समय में आईएएफ को स्टेल्थ तकनीक से लैस कर सकता है। अगर यह खरीद सौदा संभव हुआ तो इससे स्वदेश में इसी तकनीक से लैस विमानों के विकास से जुड़ी पहल पर कोई असर नहीं होगा। दोनों ही साथ-साथ चलते रहेंगे।’

हालांकि, भारतीय वायु सेना ने अभी तक रूस से इस दोहरे इंजन वाले स्टेल्थ-सक्षम विभिन्न भूमिकाओं में नजर आने वाले लड़ाकू विमान के लिए खरीद का प्रस्ताव नहीं रखा है मगर खबरों के अनुसार रूस भारत को यह विमान देने और इसके स्थानीय निर्माण में सहायता करने के लिए तैयार है।

भारतीय वायु सेना एक नाजुक मोड़ पर है। पिछले सितंबर में अंतिम दो मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन के सेवा से बाहर होने के बाद इसकी सक्रिय लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है जो पिछले 60 वर्षों में सबसे कम है जबकि कम से कम जरूरी संख्या 42 है। जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 विमानों के बेड़े भी इस दशक के अंत तक चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर होने लगेंगे। हालांकि, कुछ उन्नत विमानों को उस अवधि के बाद भी सेवा में बनाए रखा जा सकता है।

एयर वाइस मार्शल अनिल गोलानी (सेवानिवृत्त), महानिदेशक, एरोस्पेस पावर ऐंड स्ट्रैटजिक स्टडीज ने कहा, ‘भारतीय वायु सेना को न केवल 13 स्क्वाड्रन की तत्काल कमी पूरी कर इसे 42 तक पहुंचना होगा बल्कि अगले 10-15 वर्षों में इन विमानों को बदलने के लिए अतिरिक्त 10 स्क्वाड्रनों की योजना भी बनानी होगी।

भविष्य में बदलते हालात में 42 स्क्वाड्रनों की स्वीकृत संख्या पर भी पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए शायद 55 से 60 स्क्वाड्रन (दूरस्थ रूप से संचालित स्ट्राइक विमानों सहित) अधिक उपयुक्त होंगे।’

गोलानी ने कहा कि इस समय भारत के पास फिलहाल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 24 और चीन के पास 60 से अधिक हैं। गोलानी ने कहा, ‘हमें 4.5 पीढ़ी के गुणवत्तापूर्ण लड़ाकू विमानों की जरूरत है।’

Advertisement
First Published - May 17, 2026 | 10:28 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement